लुटने को बेताब जवानी

लुटने को बेताब जवानी

सबसे पहले मैं अपने पाठको को धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने मुझे ढेर सारे मेल किये। आपकी प्रतिक्रिया ने मुझे उत्साहित किया कि मैं आपको अन्तर्वासना डॉट कॉम पर वो दास्ताँ सुनाऊँ जो मेरा पहला-यौन-अनुभव था या यूँ कह लीजिये कि मेरी पहली चुदाई !

दिसम्बर के महीने के आखिरी दिनों में पंजाब में बहुत से कश्मीरी आते हैं यहाँ कारोबार के लिए, जिन्हें हम झाँगी कहते हैं।

अजनबी से दोस्ती

अजनबी से दोस्ती
आज मैं आपको एक अपनी ही जिंदगी की सच्ची घटना सुनाता हूँ।
बात उन दिनों की है जब मेरे छमाही इम्तिहान चल रहे थे, सॉरी मैं आपको अपने बारे में बताना भूल गया कि मैं बी.ई. इंदौर का छात्र हूँ। जब मेरी परिक्षाएँ चल रही थी तब मेरा दोस्त और मैं साथ में पढ़ा करते थे। तब अचानक बातों ही बातों में मैंने कहा- यार, कोई लड़की का नंबर हो तो दे समय बिताने के लिए !
तो वो मुझसे बोला- है तो एक नंबर ! मगर तू बात कैसे करेगा?
मैंने कहा- तू दे तो ! मैं कर लूँगा !

काश मैं उसका पति होता !

काश मैं उसका पति होता !

प्रेषक : SEXY BOY

मैंने अभी अभी अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ना शुरू किया है और उसी से ख्याल आया कि मैं आप सब को अपनी सच्ची आप-बीती बताऊँ।

जिस औरत की मैं बात कर रहा हूँ वो मेरी पड़ोसन शिल्पा है। दरअसल मेरी और मेरे सामने वाले घर में रहने वाले लड़के की शादी करीब करीब एक साथ ही हुई थी। मेरी बीवी और वो दोनों नई दुल्हन थी तो दोनों सहेलियाँ बन गई। वो लड़की गज़ब की चीज़ है। मेरी बीवी भी कम खूबसूरत नहीं है मगर उस लड़की की फिगर और आँखें बहुत नशीली हैं। वो काफी आधुनिक घर की है इसलिए हमेशा जींस और टॉप वगैरह पहनती है जिसमें उसकी फिगर शादी के बाद भी बड़ी मादक लगती है। उसको देखते ही मैं अपनी बीवी को भूल जाता हूँ और मन करता है उसको रगड़ दूं !

साली की चुदाई

साली की चुदाई

प्रेषक : SEXY BOY

हेल्लो दोस्तों !

मैं आज आप सबको यह सच्ची कहानी बता रहा हूँ कि कैसे मैंने अपनी साली को चोदा।

यह उन दिनों की बात है जब मेरा रिश्ता पक्का हुआ था। मेरी बीवी की ३ बहने हैं। एक बड़ी ओर दो छोटी।

सगाई के बाद मैं एक बार किसी काम से अपनी बड़ी साली के घर पर गया तो पता चला कि उसका पति टूर पर बाहर गया हुआ है और ३ दिन में वापिस आएगा।

मेरी यादगार सुहागरात

मेरी यादगार सुहागरात

प्रेषक : SEXY BOY

ये मेरी अपनी आपबीती है, ये कोई कहानी नही है और इसमे कुछ ऐसा भी नही है जो मैंने कल्पना से लिखा हो.

बचपन में जब मैं पांच साल का था तब मेरी ताईजी का देहांत होने के कारण उनकी लड़की जो मुझसे सात साल बड़ी हैं हमारे साथ रहती थी. उनका नाम मंजू है. मेरे पिताजी सरकारी ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर काम करते थे. हमें सरकारी मकान मिला हुआ था. मकान बहुत बड़ा था और उसके कमरे भी बहुत बड़े थे. चार बैडरूम, रसोई और बैठक थे उस मकान में. जबकि उस समय मैं नीरज, मेरा छोटा भाई छोटा और छोटी बहिन मुन्नी, मां, बाबूजी और मंजू जीजी कुल छः लोग ही उस मकान में रहते थे.

जैसे जैसे बड़ा हुआ एक्सरसाइज़ ठीक होने से लंड का साइज़ भी सात इंच का हो गया. पिताजी का तबादला राजस्थान के अलग अलग शहरों में होता हुआ जयपुर में कुछ समय रुका तो पिताजी ने यहाँ घर बनवा लिया. अब स्कूल में उसके बाद लड़को के कोलेज में पढ़ा लेकिन लड़कियों से बात करने में गांड फटती थी इसलिए हमारी गली में आठ लड़कियां होते हुए भी खूब इच्छा होने पर भी मैं उनमे से एक को भी पटा नही पाया. इच्छा बहुत होती थी चोदने कि लेकिन मुट्ठ मारकर ही काम चलाना पड़ता था. साइंस का छात्र था इसलिए पढ़ा सबकुछ लेकिन प्रैक्टिकल हो नही पाया. बाईस साल का होने पर मेरा कद छः फुट आ गया रंग साफ़ और चेहरा आकर्षक.

मैंने इलेक्ट्रॉनिक आइटम की रिपेरिंग की दुकान खोली. ठीक ठाक चलने लग गई. दुकान के बहार से कुछ लड़कियां मुझे देख कर चक्कर लगाती , लेकिन बात करने में अब भी मेरी गांड फटती थी. अब मुझे देखने लड़की वाले आने लग गए. एक लड़की, जो की आज मेरी पत्नी है, ठीक ठाक लगी तो जुलाइ में सगाई हो गई. सगाई छः महीने तक रही. हमने ढेरों फोन किए लेकिन लंड चूत की कोई बात करने की हिम्मत नही होती थी तो शादी होने तक उसको भी नही चोद पाया. मन में लड्डू फूटते थे कि अब मेरी कहने को भी कोई है. सगाई होने के बाद मैंने मुठ मरना बंद कर दिया.

खैर शादी हो गई और अब बहुत साल प्रतीक्षा के बाद आया सुहागरात का समय. शाम को ससुराल आनीजानी रस्म थी सो पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर छोटे सगे व रिश्ते के भाई बहिनों को साथ लेकर ससुराल गया. रात को साडे दस बज गये रस्मो रिवाज निबटाते हुए. जैसे ही फ्री हुए मैंने सभी भाई बहिनों को ऑटो रिक्शा में घर भेज दिया और पत्नी को स्कूटर पर बिठा कर उसका हाथ अपनी कमर पर कस कर सटे चिपके से घर के लिए रवाना हुए.

लंड महाराज आज अपनी पूरी जवानी में तने खड़े थे लग रहा था कि सूट फाड़ कर अभी बाहर आ जायेंगे. इच्छा तो बहुत हो रही थी कि इस जनवरी की ठण्ड में घर से सात किलोमीटर दूर कहीं सुनसान में रोक कर चोद चाद दूँ. साला लंड फेरे में हाथ पकड़ते ही कंट्रोल से बाहर था. लेकिन अपने को ये सोचकर कंट्रोल किया की माल अपना है और जरा देर बाद घर पहुँचते ही मेरा ही होने वाला है. साडे ग्यारह बजे घर पहुंचे तो चाचाजी के बेटे, मेरे बड़े भाई की पत्नी मेरी भाभी ने रस्म निभाई की ये मेरी देवरानी आज तुम्हारे साथ सोएगी. दिल उछल कर गले में आ गया. कमरे में आकर एक दूसरे की ओर पीठ करके हमने कपड़े बदले. कंडोम का पैकेट मेरे दोस्त ने पहले ही इंतजाम कर दिया था.

पत्नी ने जेवर भी उतारे और मैंने सजे धजे पलंग पर पत्नी को बिठाया. कमरे में पन्द्रह वाट का बल्ब जल रहा था. कैमरे से चार छः फोटो लिए और उसकी बगल में बैठ गया. फोन पर ढेरो बात करने वाली मेरी पत्नी के जबान पर ताला लग गया और वो नीची नजर किए बैठी थी, उसके होंट सूख रहे थे. मैंने इधर उधर की दो चार बातें करने के बाद कहा कि किस करूँ तो उसने नजरें नीचे किए धीरे से गर्दन हिला दी. लंड बैठने का नाम नही ले रहा था. मैंने उसके गाल पर किस किया जो मेरी जिन्दगी का किसी जवान लड़की का पहला किस था. फ़िर मैंने उसको बोला किस करने को तो उसने भी मेरे गाल पर धीरे से किस किया अब मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा, वो सिहर गई लेकिन हाथ नही हटाया. अब धीरे धीरे मैंने बूब्स दबाना शुरू किया मुझे वैसे ही बहुत चढी हुई थी, जिन्दगी में पहली बार बूबू दबा रहा था, मजा बहुत आ रहा था, धीरे धीरे उसका ब्लाउज खोल दिया. ब्रा भी हटा दी. सेब के साइज़ से थोड़े बड़े उसके गोरे स्पंज की बोल की तरह सख्त नरम बूबू बाहर आ गए.

पत्नी निढाल सी मेरे सीने से चिपकी पड़ी थी धीरे धीरे किस चल रहा था. अब मैंने उसके पेटीकोट को ऊपर सरकाना शुरू किया. एक बात माननी पड़ेगी की उसने किसी भी बात के लिए रोका नही. बस निढाल सी चिपकी रही. आज एक जवान नंगी लड़की मेरे बिस्तर पर थी और उसके गोरे सवा पाँच फुट के बदन पर एक बाल भी नही था और उबटन लगने से पूरा बदन मक्खन जैसा चिकना हो गया था. झांटे थी इसका मुझे ज़रा भी बुरा नही लगा. क्यूंकि झांटों से मुझे जवानी का एहसास होता है न की नादानी का. उसका बदन देखकर कोई भी फख्र कर सकता था. हालाँकि कद में हमारे नौ इंच का फर्क था.

मैंने उसे धीरे से लिटाया अपने कपड़े उतारे, तन्नाया फन्नाया लंड इतना तन चुका था की टंकार तक नही मार रहा था. लंड पर कंडोम चढाया, उत्तेजना इतनी ज्यादा थी की कभी भी क्रीम बाहर आ सकती थी. पत्नी के ऊपर आया तो उसकी टाँगे मेरी टांगों पर आ गई, मेरा माथा ठनक गया कि इसका कोई चक्कर तो नही चल चुका. उसी वक्त मुझे एक परिचित की बात याद आ गई की कुंवारी लड़की के ऊपर लड़का आते ही लड़की की टाँगे अपने आप लड़के की टांगों पर आ जाती है. और कहीं किसी किताब मैं पढ़ा था कि अच्छा चोदक वो है जो अपना वजन अपने घुटनों और कोहनी पर रखता है. अब हालत ये थी कि यदि अपना वजन घुटनों और कोहनी पर रखता तो लंड अपनी जगह से हिल जाता और यदि लंड को गीले छेद पर सेट करता तो एक कोहनी से दम नही लग रहा था. इतने में उत्तेजना इतनी ज्यादा हुई कि लंड से छः महीने का स्टॉक क्रीम बह निकला. लंड अपनी अकड़ खो चुका था. मैंने बहुत कोशिश की कि लंड दोबारा खड़ा हो जाए लेकिन वो सारी रात खड़ा नही हुआ. कंडोम निकाल कर मैंने पलंग से नीचे डाल दिया.

पत्नी को हलकी सिहरन हो रही थी. मैं समझ रहा था, उत्तेजना से उसकी तबियत बिगड़ रही थी और मैं कुछ भी कर नही पा रहा था. उसको अपनी बाँहों में लेकर पडा रहा. उसने एक बार कहा कि करो लेकिन मेरा लंड सिकुड़ चुका था.

सुबह चार बजे मां ने आवाज लगाई तो मेरी बीवी चली गई, कोई घंटे भर सोया हूँगा. नींद नही आई, सुबह साडे छः बजे बाहर निकलने कि हिम्मत नही हो रही थी. कोई सामने आएगा तो क्या होगा. जैसे तैसे हिम्मत करके कमरे से बहार आया. बुआ की लड़की सामने थी जो मुझसे दो साल छोटी थी और कुंवारी थी, हम दोनों में अच्छी पटती थी. वो गहरी नजरों से देख रही थी, मैंने पूछा क्या है. तो वो बोली “कुछ नही”. पिताजी सामने आए मैंने नजरें घुमा ली. अब मैं गुसलखाने में गया. अपने दिमाग को ठिकाने पर लाने की कोशिश करने लगा. लंड को हाथ में लिया. धीरे धीरे सहलाने लगा, दिमाग को केंद्रित किया. लगभग पाँच मिनट में लंड खड़ा होने लगा, मैंने हाथो को तेज चलाना शुरू किया. मुठ मारने में जरुरत से ज्यादा समय लगा. लेकिन सब कुछ सही हो गया. मैंने छः महीने मुठ नही मारकर अपनी उत्तेजना ख़ुद बढ़ा ली थी.

अब मुझको रात का इंतजार था. खैर धीरे धीरे रात पास आती गई. रात के साडे दस ग्यारह के करीब मेरी जान कमरे में आई, मैंने कमरे की सांकल बंद की, जान को अपनी आगोश में लिया. किस किया. लंड अब अपनी दस्तक देने लग गया. दो मिनिट बीते होंगे की पत्नी दूर हो गई. मैंने कहा कि क्या हुआ. वो बोली एमसी हो गई. उसने अपनी अभी तक कुंवारी चूत पे हाथ लगा कर देखा. बोली मम्मी को बोलती हूं. मैंने कहा “क्यूँ ” तो बोली कि नीचे सौउंगी. वो मेरी मां को बोलके आई तो साथ में कम्बल और रजाई लेके आई.

उसने बिस्तर बेड से नीचे किए. कमरा बंद किया. अब तक मैं कुछ नही बोला था. मन लेकिन थोड़ा उदास हो गया था. आज मेरा लंड तैयार था तो उसकी चूत ने धोखा दे दिया. जैसे ही वो नीचे लेटने को हुई तो मैंने उसे अपने पलंग पे खींच लिया. पत्नी बोली कि मम्मी को पता चल गया तो? मैंने कहा कौन बताएगा ? तुम या मैं. वो समझ गई और मेरे साथ पलंग पर आ गई. उसने चूत पर कपड़ा लगा लिया था. आज दिनभर में वो घरवालो के साथ घुलमिल गई थी, शर्म भी बहुत कम हो गई थी.

अब मैंने उसके होटों को अपने होटों से चिपका के किस करना शुरू किया. होंट थे कि अलग होने का नाम नहीं ले रहे थे. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू किए. मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के लिपट चुके थे. मेरे हाथ उसके बोबों को मसल रहे थे. धीरे धीरे ब्लाउज और ब्रा अलग हो गई. फ़िर थोडी देर में पेटीकोट भी खींच कर अलग कर दी. जल्दी से मैंने भी अपने कपड़े उतार फैके, मैंने बीवी को अपने ऊपर ले लिया और घमासान चालू हो गया वो ऊपर से अपनी गांड को चला रही थी और मैं नीचे से लंड को उसकी कपड़ा लगी चूत पे दबा के घिस रहा था.

होंट एक दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं थे, मेरा एक हाथ उसके बोबे दाब रहा था जो मेरे सीने से चिपके पड़े थे और दूसरा हाथ मेरी बीवी का मखमली शरीर को ऊपर से नीचे तक नाप रहा था, मेरी बीवी के हाथ मेरी गर्दन के नीचे कसे थे. हम दोनों अपनी मंजिलों कि तरफ़ बढ़ रहे थे कि मेरी बीवी अकडी और ढीली पड़ गई. उसके होंट खुल गए, हाथ ढीले हो गए, मैं रुक गया, उसकी आँखें मुंदी हुई थी. दो मिनिट बाद मैंने उसके बोबे वापस दबाने शुरू किए, उसका मुह अपनी और किया उसके होंट चूसने लगा, मेरी बीवी में जान आने लगी, उसके होंट मेरे होटों से चिपक गए, हाथ मेरी गर्दन पर कसते गए. अब वो अपनी गांड धीरे धीरे हिलाने लगी, मैं भी नीचे से उसकी चूत को लंड से दबाते हुए रगड़ने लगा, एक बार फ़िर घमासान होने लगा और लगा जैसे पलंग पर भूचाल आ गया हो. हम दोनों अपनी अपनी मंजिल कि और बढ़ने लगे फ़िर मेरी बीवी को ओर्गास्म हो गया।

लेकिन अबके मैं रुका नही. ढीली पड़ी बीवी को अपनी बाँहों में कसे नीचे से उसकी चूत को अपने लंड से रगड जा रहा था. अब मुझे भी ओर्गास्म आने लगा. मैं फ़िर भी रगड़ता गया और मुझे खूब जोर का ओर्गास्म आया. मैं भी ढीला पड़ गया. दोनों पसीने में लथपथ थे उस जनवरी कि ठंडी रात में भी. मैं ने अपने पैरों से रजाई धीरे से मेरे ऊपर पड़ी बीवी के कूल्हों तक ऊपर कर ली ताकि पसीना सूखने के बाद कोई गड़बड़ न हो. हम दोनों की एमसी की चार रातें ऐसे ही एक रात में चार चार पांच पाँच राउंड लगाते निकली. हम रात को सिर्फ़ दो घंटे मुश्किल से सो पाते थे. सुबह वो साडे चार बजे कमरा छोड़ देती थी. चारों दिन वो बिस्तर नीचे लगाती रही और मेरे पास सोती रही.

अब पांचवी रात को उसको पलंग पर लेकर कपड़े उतारने के बाद किस शुरू किया, बोबे दबाने शुरू किए, धीरे धीरे वो गरमाने लगी, उसके हाथ मैंने अपने लंड पर रख दिए आज उसकी पैंटी भी उतार फेंकी. उसकी चूत पर धीरे धीरे हाथ फेरने लगा, गर्मी बढ़ने लगी, उसके हाथ मेरे लंड पर कसने लगे, आज उसको एमसी में ब्लड भी जरा सा आया था. उसकी चूत से पानी बाहर आने लगा. मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में सरकानी शुरू की, करीब डेढ़ इंच अन्दर जाने के बाद उंगली अड़ गई, छेद छोटा था, मैंने बड़ी लाइट जलाई, उसकी टांगो को चोडा करके उसकी चूत को फैला कर अन्दर देखा तो हाईमन साफ़ नजर आया, छेद बहुत छोटा था, वापस छोटी लाइट जलाई, दोनों वापस पहले वाली पोजीशन में आ गए. अब मेरे दिमाग में ये बात आई की यदि ऐसे ही मैंने अपना सात इंच का रोड अन्दर डालने की कोशिश की तो इसको बहुत दर्द होगा, ये सोचकर मै अपनी अंगुली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

शुरू में थोड़ा सा दर्द हुआ फ़िर उसको अच्छा लगने लगा. अब मैंने उसको सारी बात समझाते हुए कहा कि या तो तुम ज्यादा दर्द सहो या कम. वो बोली कि कम दर्द करो. फ़िर मैंने कहा कि अब मैं तुम्हारी चूत में दो उंगली करूंगा, सहयोग करो, ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन की शीशी निकाल कर दोनों बड़ी उँगलियों पर अच्छी तरह वैसलीन लगाई, अब धीरे से उसकी चूत फैला कर दो उंगली उसकी चूत में डालना शुरू किया, हाईमन को चीरने पर उसको दर्द हुआ मैंने अपनी उंगली को रोका. मैं उसको दर्द नही करना चाहता था क्यूंकि फ़िर आनंद की चरम सीमा एकदम से कम हो जाती है, फ़िर एक बात और भी है, यदि अपने भी ऐसा ही दर्द हो तो क्या अपन भी मजा ले पाएंगे. धीरे धीरे करके मैंने उसके हाईमन को थोड़ा चोडा कर दिया, अब अंगूठा उसकी चूत में जाने पर दर्द नही हुआ.

मैंने सोच लिया के अब मेरी बीवी लंड ले सकती है, इतना दर्द तो वो सहन कर ही लेगी, मैं उसके ऊपर आ गया, लेकिन प्रैक्टिकल प्रॉब्लम वोही थी, की एक हाथ से लंड सही जगह पर लगाता तो लंड को घुसाने में जोर नही लगा पा रहा था, उस रात को फ़िर पिछली चार रातों जैसे ही रगड़ना पडा, समझ नही आ रहा था की अन्दर कैसे डालना है,

मेरे एक दोस्त की शादी एक महीने पहले हुई थी, उस से मिला, उसने बताया की पत्नी की गांड के नीचे तकिया रख ले, उसकी टांगो के बीच में बैठ कर लंड को उसकी चूत पर सेट कर ले, घुटने मोड़ दे, फ़िर बैठे बैठे ही उसकी दोनों जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर धक्का लगा कर लंड चूत में पेल दे. सील टूटने दे. इसी को सील टूटना कहते हैं. मैंने उसको नही बताया कि उसकी सील मैं ढीली कर चुका हूँ.

अब टाइम निकलने लगा, रात आई, मेरी बीवी वोही ग्यारह बजे कमरे में आई, धीरे धीरे कपड़े उतारते गए, हम एक दूसरे से चिपकते गए, पसीना चुहचुहाने लगा, उसकी चूत गीली हो चुकी थी, अब वो समय आ गया, जिसके लिए मेरा लंड बाइस साल से तरस रहा था, मैंने वैसलीन कि शीशी का ढक्कन खोला, बीवी कि चूत पर खूब सारी वैसलीन अन्दर तक लगाई, गांड के नीचे तकिया लगाया, उसकी टांगो को फैला कर उनके बीच में बैठ गया, लंड को उसकी चूत पर सेट किया, टांगो को घुटने से मोड़ दिया, आज मेरे लंड उसकी चूत पर एकदम सही सेट हुआ, उसकी जाँघों पर अपना हाथ जकडा, धीर से दमदार धक्का लगाया, मेरा लंड उसके हाईमन को तोड़ता हुआ डेढ़ इंच अन्दर चला गया।

बीवी बोली कि जलन होने लग रही है, मैंने अपने आपको रोका. और बीवी को पूछा कि इतना तो सहन कर सकती हो न, बोली हाँ इतना तो सहन कर लुंगी, अन्दर जाने के अहसास से मेरे लंड में एक नया कड़कपॅन महसूस हो रहा था, मैंने डेढ़ इंच में ही बीवी कि चूत को अपने लंड से सम्भोग किया, धीरे धीरे आसानी से. पहली बार मेरी क्रीम किसी चूत में छूटी थी. पास में से नेपकिन उठा कर उसकी चूत साफ़ की, सिर्फ़ दो बूँद खून और थोडी क्रीम.

अब वापस वो ऊपर और मैं नीचे, अब बिना घुसाए फ़िर घमासान चालू हुआ और जब रुका तो पन्द्रह बीस मिनिट शांत पड़े रहे, धीरे धीरे फ़िर दोनों के शरीर में गर्मी आने लगी, अबके जो किस और दबाने का कार्यक्रम चला तो बेधड़क, बिना किसी दर्द के डर के, बिना नयेपन के एहसास के. मुझे पता था कि लंड को अन्दर कैसे जाना है, जीभें एक दूसरे को चाट रही थी, उसकी चूत से पानी टपकने लगा, मैं उसकी टांगो को चौडी करके बीच में बैठ गया, लंड को चूत के छेद पर सेट किया, हलके से धीरे धीरे धक्का लगाते हुए बीवी के मुंह को दर्द के लिए देखते हुए अपने लंड को अन्दर देता चला गया।

क्या अहसास था लंड के चूत में अन्दर तक जाने का. लंड स्टील की रोड के माफिक सख्त हो गया था, थोड़ा सा कसमसाने के बाद सब कुछ ठीक हो गया, अब मैं पहली बार, लंड बीवी की चूत में दिए उसके ऊपर आ गया, हमारी जीभें एक दूसरे पर फिरने लगी, फ़िर मैं उसके बोबे चूसने लगा, उसकी चूत गीली हो गई, हमारे होंट एक दूसरे के चिपक गए और हमने एक दूसरे को बाँहों में जकड कर जो चक्की चलाई की उसके मुकाबले में क्या कोई भूकंप होगा, सच में आज पूरा मजा आ रहा था, आज पता चल रहा था की क्यूँ अप्सराएं ऋषि मुनियों की तपस्या भंग कर देती थी. दोनों ने अपना अपना काम बखूबी निबटाया. फ़िर पस्त से एक दूजे पर यूँ ही पड़े रहे, इस तरह से सातवें दिन पूरा सम्भोग हुआ.

एक महीने तक हम लोगों का कार्यक्रम रोज रात चार पाँच बार होता था, हम कई बार एक दूर पर ही सो जाते थे, लंड जब देखो खड़ा ही मिलता था, आज इस बात को सत्ताईस साल हो गए हैं, मेरी बीवी को अब मैं जो कर लूँ वो अपनी तरफ़ से पहल नहीं करती है, मुझे आज भी चार पांच बार डेली मुठ मारनी पड़ती है, मेरे पहले साल एक बेटी और उसके दो साल बाद एक बेटा हुआ लेकिन आज मैं प्यासा हूँ, मुझे कोई साथी चाहिए, बिल्कुल अपनापन सा, प्यारा सा, एक दूसरे को साथ देने वाला,…

प्रगति का अतीत- 1

प्रगति की कुछ कहानियाँ आप पहले ही अन्तर्वसना पर पढ़ चुके हैं। अब जानिए प्रगति की बीती जिन्दगी के बारे में !
प्रगति का जन्म तमिलनाडू के एक गरीब परिवार में हुआ था। उसके पिता बागवानी का काम करते थे और माँ घरों में काम करती थी। प्रगति की दो छोटी बहनें थी जो उससे 3 साल और 5 साल छोटी थी। प्रगति इस समय करीब 18 साल की थी और उसका ज़्यादा समय अपनी बहनों की देखभाल में जाता था क्योंकि उसके माता पिता बाहर काम करते थे। प्रगति स्कूल भी जाती थी। ज्यादातर देखा गया है कि समाज के बुरे लोगों की नज़र गरीब घरों की कमसिन लड़कियों पर होती है। वे सोचते हैं कि गरीब लड़की की कोई आकांक्षा ही नहीं होती और वे उसके साथ मनमर्ज़ी कर सकते हैं। प्रगति जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, आस पास के लड़कों और आदमियों की उस पर नज़र पड़ रही थी। वे उसको तंग करने और छूने का मौका ढूँढ़ते रहते थे। प्रगति शर्म के मारे अपने माँ बाप को कुछ नहीं कह पाती थी।
एक दिन स्कूल में जब वह फीस भर रही थी, तो मास्टरजी ने उसे अकेले में ले जाकर कहा कि अगर वह चाहे तो वे उसकी फीस माफ़ करवा सकते हैं। प्रगति खुश हो गई और मास्टरजी को धन्यवाद देते हुए बोली कि इससे उसके पिताजी को बहुत राहत मिलेगी। मास्टरजी ने कहा पर इसके लिए उसे कुछ करना होगा। प्रगति प्रश्न मुद्रा में मास्टरजी की तरफ देखने लगी तो मास्टरजी ने उसे स्कूल के बाद अपने घर आने के लिए कहा और बोला कि वहीं पर सब समझा देंगे।
चलते चलते मास्टरजी ने प्रगति को आगाह किया कि इस बारे में किसी और को न बताये नहीं तो बाकी बच्चे भी फीस माफ़ करवाना चाहेंगे !! प्रगति समझ गई और किसी को न बताने का आश्वासन दे दिया। मास्टरजी क्लास में प्रगति पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ भी कर रहे थे। प्रगति मास्टरजी से खुश थी। जब स्कूल की घंटी बजी तो मास्टरजी ने उसे आँख से इशारा किया और अपने घर को चल दिए। प्रगति भी अपना बस्ता घर में छोड़ कर और अपनी बहन को बता कर कि वह पढ़ने जा रही है, मास्टरजी के घर को चल दी।
मास्टरजी घर में अकेले ही थे, प्रगति को देख कर खुश हो गए और उसकी पढ़ाई की तारीफ़ करने लगे। प्रगति अपनी तारीफ़ सुन कर खुश हो गई और मुस्कराने लगी। मास्टरजी ने उसे सोफे पर अपने पास बैठने को कहा और उसके परिवार वालों के बारे में पूछने लगे। इधर उधर की बातों के बाद उन्होंने प्रगति को कुछ ठंडा पीने को दिया और कहा कि वह अगर इसी तरह मेहनत करती रहेगी और अपने मास्टरजी को खुश रखेगी तो उसके बहुत अच्छे नंबर आयेंगे और वह आगे चलकर बहुत नाम कमाएगी। प्रगति को यह सब अच्छा लग रहा था और उसने मास्टरजी को बोला कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगी !! मास्टरजी ने उसके सर पर हाथ रखा और प्यार से उसकी पीठ सहलाने लगे। मास्टरजी ने प्रगति को हाथ दिखाने को कहा और उसके हाथ अपनी गोदी में लेकर मानो उसका भविष्य देखने लगे। प्रगति बेचारी को क्या पता था कि उसका भविष्य अँधेरे की तरफ जा रहा है !
हाथ देखते देखते मास्टरजी अपनी ऊँगली जगह जगह पर उसकी हथेली के बीच में लगा रहे थे और उस भोली लड़की को उसके भविष्य के बारे में मन गढ़ंत बातें बता रहे थे। उसे राजकुमार सा वर मिलेगा, अमीर घर में शादी होगी वगैरह वगैरह !!
दोनों हाथ अच्छी तरह देखने के बाद उन्होंने उसकी बाहों को इस तरह देखना शुरू किया मानो वहां भी कोई रेखाएं हैं। उसके कुर्ते की बाजुओं को ऊपर कर दिया जिससे पूरी बाहों को पढ़ सकें। मास्टरजी थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ ऐसा बोल देते जैसे कि वे कुछ पढ़ कर बोल रहे हों। अब उन्होंने प्रगति को अपनी टाँगें सोफे के ऊपर रखने को कहा और उसके तलवे पढ़ने लगे। यहाँ वहां उसके पांव और तलवों पर हाथ और ऊँगली का ज़ोर लगाने लगे जिससे प्रगति को गुदगुदी होने लगती। वह अजीब कौतूहल से अपना सुन्दर भविष्य सुन रही थी तथा गुदगुदी का मज़ा भी ले रही थी। जिस तरह मास्टरजी ने उसके कुर्ते की बाजुएँ ऊपर कर दी थी ठीक उसी प्रकार उन्होंने बिना हिचक के प्रगति की सलवार भी ऊपर को चढ़ा दी और रेखाएं ढूँढने लगे। उसके सुन्दर भविष्य की कोई न कोई बात वे बोलते जा रहे थे।
अचानक उन्होंने प्रगति से पूछा कि क्या वह वाकई में अपना और अपने परिवार वालों का संपूर्ण भविष्य जानना चाहती है? अगर हाँ, तो इसके लिए उसे अपनी पीठ और पेट दिखाने होंगे। प्रगति समझ नहीं पाई कि क्या करे तो मास्टरजी बोले कि गुरु तो पिता सामान होता है और पिता से शर्म कैसी? तो प्रगति मान गई और अपना कुर्ता ऊपर कर लिया। मास्टरजी ने कहा इस मुद्रा में तो तुम्हारे हाथ थक जायेंगे, बेहतर होगा कि कुर्ता उतार ही दो। यह कहते हुए उन्होंने उसका कुर्ता उतारना शुरू कर दिया। प्रगति कुछ कहती इससे पहले ही उसका कुर्ता उतर चुका था।
प्रगति ने कुर्ते के नीचे ब्रा पहन रखी थी। मास्टरजी ने उसे सोफे पर उल्टा लेटने को कहा और उसके पास आकर बैठ गए। उनके बैठने से सोफा उनकी तरफ झुक गया जिससे प्रगति सरक कर उनके समीप आ गई। उसका मुँह सोफे के अन्दर था और शर्म के मारे उसने अपनी आँखों को अपने हाथों से ढक लिया था। पर मास्टरजी ने उसकी पीठ पर अपनी एक ऊँगली से कोई नक्शा सा बनाया मानो कोई हिसाब कर रहे हों या कोई रेखाचित्र खींच रहे हों। ऐसा करते हुए वे बार बार ऊँगली को उसकी ब्रा के हुक के टकरा रहे थे मानो ब्रा का फीता उनको कोई बाधा पहुंचा रहा था। उन्होंने आखिर प्रगति को बोला कि वे एक मंत्र उसकी पीठ पर लिख रहे हैं जिससे उसके परिवार की सेहत अच्छी रहेगी और उसे भी लाभ होगा। यह कहते हुए उन्होंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। प्रगति घबरा कर उठने लगी तो मास्टरजी ने उसे दबा दिया और बोले घबराने और शरमाने की कोई बात नहीं है। यहाँ पर तुम बिल्कुल सुरक्षित हो !!
उस गाँव में बहुत कम लोगों को पता था कि मास्टरजी, यहाँ आने से पहले, आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर में शिक्षक थे और वहां से उन्हें बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप के कारण निकाल दिया था। इस आरोप के कारण उनकी सगाई भी टूट गई थी और उनके घरवालों तथा दोस्तों ने उनसे मुँह मोड़ लिया था। अब वे अकेले रह गए थे। उन्होंने अपना प्रांत छोड़ कर तमिलनाडु में नौकरी कर ली थी जहाँ उनके पिछले जीवन के बारे में कोई नहीं जानता था। उन्हें यह भी पता था कि उन्हें होशियारी से काम करना होगा वरना न केवल नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, हो सकता है जेल भी जाना पड़ जाये।
उन्होंने प्रगति की पीठ पर प्यार से हाथ फेरते हुए उसे सांत्वना दी कि वे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे। अचानक, मास्टरजी चोंकने का नाटक करते हुए बोले,”तुम्हारी पीठ पर यह सफ़ेद दाग कब से हैं?”
प्रगति ने पूछा,”कौन से दाग?”
तो मास्टरजी ने पीठ पर 2-3 जगह ऊँगली लगाते हुए बोला,” यहाँ यहाँ पर !” फिर 1-2 जगह और बता दी।
प्रगति को यह नहीं पता था, बोली,”मुझे नहीं मालूम मास्टरजी, कैसे दाग हैं?”
मास्टरजी ने चिंता जताते हुए कहा,”यह तो आगे चल कर नुकसान कर सकते हैं और पूरे शरीर पर फैल सकते हैं। इनका इलाज करना होगा।”
प्रगति ने पूछा,”क्या करना होगा?”
मास्टरजी ने बोला,”घबराने की बात नहीं है। मेरे पास एक आयुर्वैदिक तेल है जिसको पूरे शरीर पर कुछ दिन लगाने से ठीक हो जायेगा। मेरे परिवार में भी 1-2 जनों को था। इस तेल से वे ठीक हो गए। अगर तुम चाहो तो मैं लगा दूं।”
प्रगति सोच में पड़ गई कि क्या करे। उसका असमंजस दूर करने के लिए मास्टरजी ने सुझाव दिया कि बेहतर होगा यह बात कम से कम लोगों को पता चले वरना लोग इसे छूत की बीमारी समझ कर तुम्हारे परिवार को गाँव से बाहर निकाल देंगे। फिर थोड़ी देर बाद खुद ही बोले कि तुम्हारा इलाज मैं यहाँ पर ही कर दूंगा। तुम अगले ७ दिनों तक स्कूल के बाद यहाँ आ जाना। यहीं पर तेल की मालिश कर दूंगा और उसके बाद स्नान करके अपने घर चले जाया करना। किसी को पता नहीं चलेगा और तुम्हारे यह दाग भी चले जायेंगे। क्या कहती हो?
बेचारी प्रगति क्या कहती। वह तो मास्टरजी के बुने जाल में फँस चुकी थी। घरवालों को गाँव से निकलवाने के डर से उसने हामी भर दी। मास्टरजी अन्दर ही अन्दर मुस्करा रहे थे।
मास्टरजी ने कहा, “नेक काम में देरी नहीं करनी चाहिए। अभी शुरू कर देते हैं !”
वे उठ कर अन्दर के कमरे में चले गए और वहां से एक गद्दा और दो चादर ले आये। गद्दे और एक चादर को फर्श पर बिछा दिया और दूसरी चादर प्रगति को देते हुए बोले,”मैं यहाँ से जाता हूँ, तुम कपड़े उतार कर इस गद्दे पर उल्टी लेट जाओ और अपने आप को इस चादर से ढक लो।” जब तुम तैयार हो जाओ तो मुझे बुला लेना। प्रगति को यह ठीक लगा और उसने सिर हिला कर हाँ कर दी। मास्टरजी फट से दूसरे कमरे में चले गए।
उनके जाने के थोड़ी देर बाद प्रगति ने इधर उधर देखा और सोफे से उठ खड़ी हुई। उसने कभी भी अपने कपड़े किसी और घर में नहीं उतारे थे इसलिए बहुत संकोच हो रहा था। पर क्या करती। धीरे धीरे हिम्मत करके कपड़े उतारने शुरू किये और सिर्फ चड्डी में गद्दे पर उल्टा लेट गई और अपने ऊपर चादर ले ली। थोड़ी देर बाद उसने मास्टरजी को आवाज़ दी कि वह तैयार है।
मास्टरजी अन्दर आ गये और गद्दे के पास एक तेल से भरी कटोरी रख दी। वे सिर्फ निकर पहन कर आये थे। कदाचित् तेल से अपने कपड़े ख़राब नहीं करना चाहते थे। उन्होंने धीरे से प्रगति के ऊपर रखी चादर सिर की तरफ से हटा कर उसे पीठ तक उघाड़ दिया। प्रगति पहली बार किसी आदमी के सामने इस तरह लेटी थी। उसे बहुत अटपटा लग रहा था। उसने अपने स्तन अपनी बाहों में अच्छी तरह अन्दर कर लिए और आँखें मींच लीं। उसक

पति के सारे दोस्त और मैं अकेली

पति के सारे दोस्त और मैं अकेली

प्रेषक : SEXY BOY

हेल्लो दोस्तों, मैंने पिछले दिनों अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ीं तो मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपने अनुभव आपके साथ बाटूँ। मैं आपको अपने बारे में बताती हूँ.

मेरा नाम फाल्गुनी है. मैं ३४ साल की शादीशुदा औरत हूँ. मेरे पति बिज़नस के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं.

कुछ दिन पहले की बात है मेरे पति दो दिन के लिए घर से बाहर गए हुए थे और मैं घर में अकेली टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रही थी. ब्लू फ़िल्म देख देख कर मेरी चूत में से पानी आने लगा था. मेरा मन कर रहा था कि कोई मज़ेदार लंड मिल जाए तो जी भर के चुदाई करवाऊं.

वो कहते हैं ना कि सच्चे दिल से मांगो तो सब कुछ मिलता है. घर की कॉल बेल बजी तो मुझे लगा कि भगवान् ने मेरी सुन ली. मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरे पति के ख़ास दोस्तों वर्मा और गुप्ता बाहर खड़े थे.

अचानक उनको देख कर मैं चौंक गई. मैंने उनसे कहा कि ‘ये’ तो बाहर गए हैं दो दिन बाद आयेंगे. यह बात सुन कर वो दोनों भी उदास हो गए और बाहर से ही वापस जाने लगे. मैंने सोचा कि अगर इन लोगों को अन्दर नहीं बुलाऊंगी तो ये लोग बुरा मान जायेंगे. मैंने उनसे कहा कि आप लोग अन्दर आ जाईये. ये सुन कर मेरे पति के खास दोस्त वर्मा ने कहा कि नहीं भाभी हम लोग चलते हैं. हम लोग तो ये सोच कर आए थे कि पाटिल घर में होगा तो बैठ कर दो दो पैग लगायेंगे.

मैं आप लोगों को बता दूँ कि पाटिल मेरे पति का नाम है और ये सारे दोस्त हमारे घर में अक्सर दारू पार्टी करते हैं. क्योंकि इन लोगों के घरों मैं दारू पीना मना है.

मेने एक अच्छे मेजबान का फ़र्ज़ निभाते हुए कहा कि कोई बात नहीं आप लोग अन्दर बैठ कर पैग लगा लीजिये मुझे कोई परेशानी नहीं है. मेरी बात सुन कर दोनों खुश होते हुए बोले “क्या सचमुच हम लोग अन्दर बैठ कर पी सकते हैं.”

मैंने कहा “क्यों नहीं आप का ही घर है आप लोग अन्दर आ जाईए, मैं आप लोगों के लिए पानी और सोडा का इंतजाम कर देती हूँ.”

ये सुन कर गुप्ता ने कहा कि एक शर्त है “आपको भी हमारा साथ देना होगा !”

मैं पहले भी कई बार अपने पति के सामने इन लोगों के साथ दारू पी चुकी थी इसलिए इन लोगों को पता था कि मैं भी दारू पीती हूँ. मैंने तुंरत हाँ भर दी और वो दोनों अन्दर आ गए. अन्दर आते ही उनकी निगाह टीवी पर चल रही ब्लू फ़िल्म पर गई जिसे मैं बंद करना भूल गई थी. मैंने जल्दी से शरमा कर टीवी बंद कर दिया. लेकिन वो दोनों ये सब देख कर मुस्करा रहे थे. मैं किचेन मैं पानी और सोडा लेने चली गई.

किचिन में जाकर मैंने सोचा कि मैं तो एक लंड के इंतज़ार मैं थी और भगवान् ने मुझे दो दो लंड गिफ्ट में भेज दिए. क्यों ना इस मौके का फायदा उठाया जाए और ये सोच कर मैंने सोडा और पानी की बोतल फ्रीज़ में से निकली और तीन गिलास साथ में ले कर वापस कमरे में आ गई. वर्मा ने अपनी जेब से व्हिस्की कि बोतल निकाल कर मुझे दी और मैं तीन पैग बनाने लगी. वो लोग साथ मैं खाने के लिए स्नेक्स भी लाये थे. हम लोग बातें करते हुए पैग लगा रहे थे. कुछ ही देर में हम सभी पर थोड़ा थोड़ा सुरूर छाने लगा.

उन दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और फ़िर गुप्ता ने मुझसे पूछा “भाभी आप टीवी पर ब्लू फ़िल्म देख रहीं थीं तो फिर आपने टीवी बंद क्यों कर दिया. टीवी चलाओ ना हम लोग भी फ़िल्म देखना चाहते हैं. “

अब तक मुझ पर भी शराब नशा चढ़ने लगा था. मैंने सोचा कि यही मौका है चुदाई का माहौल बनाने का. ये सोच कर मैं उठी और टीवी चालू करने लगी. टीवी चालू करते हुए मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया जिसे मैंने जानबूझ कर ठीक नहीं किया. मेरे कसे हुए ब्लाउज में से बड़े बड़े बूब्स आधे बाहर निकल आए थे. मैने तिरछी नज़र से देखा कि वो दोनों मेरे बूब्स पर निगाह गड़ाये हुए मुस्करा रहे हैं. मैने टीवी पर ब्लू फ़िल्म चालू कर दी और उसी सोफे पर जा कर बैठ गई जिस पर वो दोनों बैठे हुए थे. अब मैं उन दोनों के बीच में बैठी थी. टीवी पर चल रही फ़िल्म मैं भी एक औरत को दो आदमी चोद रहे थे. ये सीन देख कर हम तीनो ही गरम हो गए. मैने जान बूझ कर अपना पल्लू नीचे सरका दिया और सोफे पर आधी लेट गई. मेरे बगल में बैठे वर्मा ने पहल की और धीरे से मेरे बूब्स के ऊपर हाथ फिराने लगा. मैने कोई विरोध नहीं किया और आँखे बंद कर लीं. थोडी ही देर में उन दोनों ने मिल कर मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और मेरे बड़े बड़े फलों का रस चूसने लगे. अब हम लोग खुल चुके थे इसलिए मैने भी हाथ बढ़ा कर पैंट के ऊपर से ही उनके लंड को टटोलना शुरू कर दिया था. वर्मा मेरे होटों को अपने मुंह में ले कर चूसने लगा और गुप्ता मेरी एक चूची को मुंह में भर कर पीने लगा.

अभी हमारा खेल चालू हुआ ही था कि अचानक घर कि कॉल बेल फ़िर से बज गई. हम तीनो चौंक गए. मैने कहा कि अब कौन हो सकता है.

तभी गुप्ता ने कहा ” अरे यार में समझ गया, शर्मा और ठाकर होंगे हमने उन लोगों को भी बुलाया था.”

मैंने जल्दी से टीवी बंद कर दिया और अपने कपडे ठीक करने लगी तो वर्मा ने मेरे हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया और कहा ” रहने दो भाभी ये लोग भी अपने ही दोस्त हैं इनसे क्या शरमाना”

जब तक मैं कुछ कहती तब तक गुप्ता ने दरवाजा खोल दिया था और मेरे सामने तीन नए लोग खड़े थे. जिनका नाम शर्मा, ठाकर और नारंग था.

अब घर में पॉँच मर्द थे और मैं अकेली औरत. शराब का दौर चल रहा था सब लोग नशे में थे. मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे. मेरी बरसों की इच्छा आज पूरी होने जा रही थी. मेरी इच्छा थी की मैं एक साथ पॉँच मर्दों के साथ चुदाई का खेल खेलूं और आज ये सपना सच होने वाला था. किसी ने मेरे बदन से ब्लाऊज़ उतर दिया था. वर्मा और गुप्ता मेरी एक एक चूची को मुंह में लेकर चूस रहे थे. ठाकर जो बाद में आया था उसने अपना लंड निकाल कर मेरे मुंह में डाल दिया और नारंग और शर्मा मेरे नीचे के कपडे हटाने की कोशिश कर रहे थे. मैंने उन सब को रोक कर कहा कि चलो अन्दर बेड रूम मैं चलते हैं. ये सुन कर उन पांचों ने मुझे गोदी में उठा लिया और ले जा कर बेड पर डाल दिया. अब मेरे बदन पर कोई कपडा नहीं था.

ठाकर जिसका लंड काला और ज्यादा ही लंबा था उसने मेरे मुंह में अपना पूरा लंड डाल दिया. मैं उसके लंड को लेमनचूस की तरह चूसने लगी.

नारंग और वर्मा ने मेरे बोबे मसलने और चूसने चालू कर दिए.

वर्मा ने मेरी दायीं तरफ़ आ कर मेरे हाथ में अपना मोटा लंड पकड़ा दिया. जिसे मैंने आगे पीछे करना चालू कर दिया.

गुप्ता पलंग के नीचे बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा. मुझे जन्नत का मज़ा मिल रहा था.

मेरे चारों तरफ़ अलग अलग तरह के लंड थे. मैं किसी भी लंड को हाथ में लेकर खेलने लगती. मेरे मुंह में भी अलग अलग साइज़ के लंड डाले जा रहे थे और मैं सभी लंड बड़े प्यार से चाट और चूस रही थी. तभी उनमे में से किसी ने मेरी चूत में अपनी जीभ डाल दी. खुशी के मारे मेरे मुंह से चीख निकल गई.

मैं जोर से चिल्लाई “वैरी गुड….. ऐसे ही चूसो मादरचोदों चाटो मेरी चूत को….”. मैं पूरे नशे में थी और उछाल उछाल कर चूत चुसवा रही थी.

ठाकर ने मेरे मुंह में लंड डालकर मुंह की ही चुदाई शुरू कर दी. दो लोग मेरे हाथ में लंड पकड़ा कर मुठ मरवा रहे थे. एक जन अभी खाली था इसलिए मैंने कहा,”मेरे यारोंरोंरोंरोंरोंरों….. अभी तो एक छेद बाकी है उसमे भी तो कुछ डालो”

मेरी बात सुनते ही वर्मा ने सब को रोक कर कहा कि रुको पहले आसन लगा लेते हैं. सब ने अपनी अपनी पोसिशन ले ली.

नीचे वर्मा सीधा लेट गया और मुझसे कहा “आओ भाभीजान मेरे ऊपर आओ मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड डाल कर मज़ा देता हूँ.”

मैं तुंरत अपनी गांड चौड़ी करके उसके लंड पर बैठ गई. वर्मा का लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा मोटा नहीं था इसलिए आराम से मेरी गांड में चला गया.

दोस्तों मैं आपको बता दूँ कि मेरे पति भी काफी माहिर चुद्दकड़ हैं और मुझे बहुत मज़ेदार ढंग से चोदते हैं लेकिन मेरी प्यास उतनी ही बढ़ जाती है जितना मैं चुदवाती हूँ. यही कारण है कि आज मैं अपने पति के पाँच दोस्तों से एक साथ चुदवाने को तैयार हूँ.

हाँ तो दोस्तों वर्मा का लंड मैंने अपनी गांड में डाल लिया और सीधी होकर अपनी चूत ऊपर की तरफ करते हुए बोली ” चलो कौन मेरी चूत का बाजा बजाना चाहता है वो आगे आ जाए.”

नारंग जिसका लंड थोडी देर मैंने मुंह में डाल कर चूसा था वो मेरे ऊपर आ गया और निशाना लगाते हुए बोला “मेरी जान सबसे पहले मेरा स्वाद चखो.”

गुप्ता भी मेरे सर कि तरफ़ आते हुए बोला “मेरी प्यारी भाभी मुझे अपने मुंह में डालने दो प्लीज़.”

अब शर्मा और ठाकर बच गए थे. मैंने उनसे कहा कि आओ मेरे यारो, अभी तो मेरे दोनों हाथ खाली हैं.

इस तरह पोसिशन लेने के बाद घमासान चुदाई चालू हो गई. मेरी गांड और चूत में एक साथ लंड अन्दर बाहर हो रहे थे. मुझे जम कर मज़ा आ रहा था. मैं बीच बीच में अपने मुंह से लंड निकाल कर सिस्कारियां लेने लगी “आआआ…. और जोर सेसेसेसे….. चोद….ओऊऊऊऊऊ…..फाड़ डालोऊऊऊओ… मेरी चूत…. बहनचोदों एक भी छेद मत छोड़ना… सब जगह डाल दोऊऊऊओ…. फाड़ डाल मेरी गांड…. वर्मा….के बच्चे….. और जोर से नारंग…अन्दर तक डाल अपना हथियार…यार…आर आर अअअ आ आ आ….मज़ा आ गया.”

काफी देर तक पोसिशन बदल बदल कर ये चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा. कभी किसी ने मेरे मुंह में लंड डाला कभी किसी ने. अलग अलग लंडों का स्वाद मेरे मुंह में आता रहा. करीब एक घंटे तक चले इस खेल में मैं पॉँच बार झड़ चुकी थी. अब मेरी चुदाई की आग शांत होने लगी थी.

मैंने उन सबसे कहा “मेरे यारों…एक बात ध्यान रखना कोई भी अपना पानी इधर उधर नहीं डालेगा….सबको मेरे मुंह में ही अपना पानी डालना है… मैं बहुत प्यासी हूँ….मेरी प्यास तुम्हारे पानी से ही बुझेगी. कम से कम पचास ग्राम पानी पिलाना मुझे.”

वो सब लोग भी अब अपनी मंजिल पर पहुँच चुके थे.

गुप्ता ने कहा “चल भोसड़ी की अब नीचे लेट जा और पानी पी… आज नहला देंगे तुझे मेरी जान.”

मैं पलंग पर सीधी लेट गई और उन पांचों ने मेरे मुंह के चारों तरफ़ घेरा डाल लिया. मैंने एक एक करके सबके लंड को मुंह में ले कर पानी निगलना चालू कर दिया. मेरा पूरा मुंह और गला लिसलिसे वीर्य से भर गया. सबका मिलाजुला स्वाद मुझे कॉकटेल का मज़ा दे रहा था और मैं स्वाद ले ले कर उन सबका पानी पीती चली गई और सबके लंडों को चाट चाट कर साफ़ कर दिया. मेरी बरसों की तम्न्ना आज पूरी हो गई थी.

दोस्तों मेरी चुदाई के और भी मज़ेदार किस्से मैं आप को बताऊंगी पहले आप मुझे जरूर बताएं कि ये किस्सा आप को कैसा लगा

अभिलाषा की अभिलाषा

अभिलाषा की अभिलाषा

प्रेषक/प्रेषिका : SEXY BOY/छम्मक छल्लो

यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली कहानी है, यह एक सच्ची घटना है।

मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती थी अभिलाषा। वह मुझसे एक साल छोटी है। उसकी माँ और मेरी माँ काफी अच्छी सहेलियाँ हैं। वह बचपन से ही मुझसे किताबों और पढ़ाई के मामले में मदद मांगती रही है। आंटी को इस चीज़ से कभी भी एतराज़ नहीं हुआ।

अब ज़रा अपनी छम्मक छल्लो यानी अभिलाषा के बारे में बता दूँ। दिखने में तो वो बिलकुल ऐश लगती है पर है बहुत शांत किस्म की लड़की। जैसे जैसे वो बड़ी होती गई है, वैसे वैसे ही उसकी गांड का साइज़ घूरने लायक ही नहीं, बल्कि मज़े लेने लायक भी हो गया है। उसका वक्षस्थल तो मादरचोद ऐसे हो गया है कि अगर आपको भी किसी दिन मौका हाथ लगे तो उनके बीच अपना लंड फंसा दो और आगे पीछे करके उसके मुँह में ही झड़ जाओ।

अब उसकी शादी कर दी गई है और वो शहर से काफी दूर जा चुकी है।

इन बातों के बाद मैं अपना परिचय भी दे दूँ। मैं ६ फीट लम्बा एक शरीफ सा इंसान हूँ जिसको हफ्ते में कम से कम एक बार चूत तो चाहिए ही चाहिए। इसके लिए मैं पैसों की परवाह भी नहीं करता। मैंने अपनी इंजीनियरिंग ख़त्म कर ली है और एक छोटी सी कंपनी में लगा हुआ हूँ। बकचोदी के बाद मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं इंजीनियरिंग के पहले साल में था। तब मैं 19 साल का था और तब से ही मैंने चूत का स्वाद चखना शुरू किया था। हम सब दोस्त मिल कर सस्ती लडकियाँ कहीं न कहीं से लेकर आते थे।

अभिलाषा के साथ मेरी लॉटरी उन्हीं दिनों खुल गई थी। वो मुझसे पढ़ाई के लिए सहायता मांगने आती और मैं उसके साथ शरारत करने की कोशिश करता रहता। हांलांकि चूत की कमी तो थी नहीं मेरे पास, पर मैं सोचता था कि अगर इसकी मिल जाए तो मज़ा ही आ जाये। ऊपर से परिवार का भी डर था। पर ज़िन्दगी में कुछ चीज़ें पाने के लिए रिस्क भी तो लेना ही पड़ता है ना।

मैं धीरे धीरे उसको अपने दायरे के अन्दर ले आने की कोशिश कर रहा था।

वह एक दिन आई, उसको मैंने थोड़ा सा पढ़ाया। जब वो जाने लगी तो मैंने उसको आँख मार दी। वो मुस्कुरा के चली गई। मुझे कुछ कुछ होने लगा। वो बाद में जब भी आती मैं उसको थोड़ा छू देता। वो फिर से मुस्कुरा देती। अब तो मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों पे रखना शुरू कर दिया था। अब वो मेरे पास कुछ ज्यादा ही आने लगी थी, शायद उसको मेरी ठर्कियों वाली हरकतों से मज़ा आता था। देखने से तो ऐसा ही लगता था कि उससे भी नहीं रहा जा रहा।

वो अगली बार ऐसा मौका तलाश कर आई जब मेरे घर पर मेरे अलावा और कोई नहीं था। वो स्कर्ट में आई थी। क्या माल लग रही थी। बिलकुल ऐश। मैं तो देखता ही रह गया। पढ़ने के बहाने वो मुझसे चिपक कर बैठ गई। उसको पता था कि मैं उसकी जांघ पर हाथ ज़रूर रखूँगा। मैंने ऐसा ही किया। लेकिन अब जो हुआ उससे मेरा लंड गन्ने के जैसे खड़ा हो गया। उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और स्कर्ट के ऊपर से ही अपनी चूत पर रख दिया। क्या जन्नत थी उसकी चूत। स्कर्ट के ऊपर से बिल्कुत मखमल सी मुलायम लग रही थी। मुझे क्या था, मैं उसे सहलाने लगा। पढ़ाई लिखाई माँ चुदाये।

वो आँख बंद करके कुर्सी पर ही बैठी रही और मज़े लेने लगी। मुझको अब असली दर्शन करने थे। मैं उसको चूमते हुए अपनी बाहों में भर के बिस्तर तक ले आया। मैंने नीचे से ही शुरू किया। स्कर्ट को ऊपर कर के मैंने उसकी दोनों टांगों को चौड़ा दिया। उसकी सफ़ेद पैंटी गीली हो चुकी थी। उसकी पैंटी को मैंने एक तरफ सरकाया और बिना बालों वाली कुँवारी चूत के दर्शन किये। गज़ब की महक रही थी उसकी चूत।

पहले मैंने उसको ऊँगली से चोदना शुरू किया। उसने भी इसी बीच मेरा पजामा उतार दिया। वह मेरे लंड की तरफ बढ़ी और हाथ में ले लिया और मुठ मारने लगी। अब हम 69 में हो लिए। दोस्तों इसी को अन्तर्वासना कहते हैं। सब कुछ अपने आप होने लगता है। मैं उसकी फुद्दी चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी। काफी देर तक ये करने के बाद जब मैं झड़ने वाला था और मुझसे रहा नहीं गया, तब मैं उसके ऊपर सीधे से आया और अपना लंड उसके दरवाज़े में डाल दिया। चूंकि मेरी सफ़ेद नदी छूटने ही वाली थी, दो तीन घक्कों में ही मैं पूरा छूट गया। उसके चेहरे के हाव-भाव से ऐसा लग रहा था की वो अभी तक संतुष्ट नहीं हुई थी।

मेरा लंड तो थक चुका था पर उसे भी खुश करना था। इसलिए मैंने अपने मुँह और ऊँगली दोनों से ही उसके प्यार के अंग को खुश किया। इसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। उसने कहा कि आगे से जब भी उसको अपनी चूत को ऊँगली करने का मन करेगा तो वो मेरे पास ही आ जाया करेगी। मैं तो ये सुन के हैरान ही हो गया कि अभिलाषा की अभिलाषा ऐसी रंडियों वाली हो सकती है।

ऐसे ही फिर मैंने कई बार उस बहन की लौड़ी की चुदाई करी। कभी उसके घर में तो कभी अपने घर में। पर 22 साल की उम्र में ही उसकी शादी कर दी गई। वो अब दूर है। तब से अब तक जब भी वो अपने घर आई है, हम मिलें तो काफी बार हैं पर चुदाई की नौबत कभी नहीं आई है।

दोस्तो, बताओ अब हमें फिर चुदाई का आनंद उठाना चाहिए या नहीं

रहस्यमयी रूबी

रहस्यमयी रूबी

लेखक : SEXY BOY

सहयोगी : कामिनी

अन्तर्वासना पर मेरी यह कहानी ये उन कहानियों से अलग है जो कोमलता के साथ चुदाई करते हैं। मैं… रहस्य…रोमान्च… रूहों की दुनिया में आपको ले चलता हूं। यहां आपको इन सबके साथ सहवास……… उत्तेजना ……… का भी भरपूर आनन्द मिलेगा।

मेरा नाम जो हन्टर है। मैं २५ साल का इसाई युवक हूँ। मुझे घूमने फ़िरने का बहुत शौक है। इन गर्मी के दिनो में मुझे यह मौका मिल गया। हम सभी लोग जयपुर में एक जगह एकत्र हो गये थे। वहां से हमें बस में जाना था। हम सभी करीब १७ लोग थे। ज्यादातर जोड़े में थे। पर मैं अकेला ही था।

बस रात को लगभग १० बजे रवाना हुई। ऊपर वाले सभी स्लीपर थे और नीचे सीटें थी। मुझे सिंगल वाला स्लीपर मिल गया था। सुबह होते होते हम लोग उज्जैन पहुँच गये थे। यहां पर हम होटल में रुके थे। मुझे कमरा नम्बर २० मिला था।

मैं अपने कमरे में गया और नहा धो कर फ़्रेश हो गया। चाय पी कर सभी लोग घूमने निकल पड़े। मैंने उज्जैन देखा हुआ था इसलिये मैं पास में फ़्रीगन्ज मार्केट चला गया। पर जल्द ही वापस आ गया।

मैने होटेल के काऊन्टर पर देखा तो वहां पर एक खूबसूरत सी लड़की खड़ी थी। उसे देखते ही मैं पहचान गया। मैने अपने कमरे की चाबी मांगी। उसने मुझे १९ नम्बर की चाबी दी। मैने कहा,”अरे… रूबी तुम…!”

“हाय……जो…तुम हो…”

“ये तो १९ नम्बर की है……।”

“हा ये मेरा कमरा है… तुम चलो मैं आती हू।” रूबी मुस्करा कर बोली…

हम दोनो विद्यार्थी जीवन से साथ थे। मैं मन ही मन ही मन में रूबी को चाहता था, पर माईकल को यह पसन्द नहीं था।

“ओह्…हाँ………”

मैने चाबी ली और आराम से सीढियां चढ़ता हुआ कमरा नम्बर १९ पर आ गया। मैने चाभी लगा कर दरवाजा खोला। कमरे में एक अजीब सी ठन्डक थी। एकाएक मैने देखा कि रूबी कमरे में मेरे सामने खड़ी थी। एक झीना सा नाईट गाऊन पहने हुई थी। जिसमें उसका पूरा नंगा बदन नज़र आ रहा था। इतनी बेशर्मी से मै सकपका गया।

“तुम अन्दर कैसे आई…?”

“पीछे से ……दरवाजा तो बन्द कर दो… देखो मैं तो ……कोई देख लेगा “

“अंह्…… हां …… पर ये क्या… तुम ऐसे …… ?” वास्तव में मै भौचक्का रह गया था।

“आओ ना…थोडी मस्ती करेंगे………भूल गये क्या सब……”

मै कैसे भूल सकता था भला……… हम दोनो एक साथ घूमने जाया करते थे …… मौका मिलने पर वो कभी मेरे लन्ड को मसल देती थी और कभी मेरी गान्ड पर थपथपाती थी। मुझे उसकी इस हरकत पर शरीर में सनसनी दौड जाती थी। मै भी मौका पाकर उसके उरोजो को दबा देता था। उसके नरम नरम चूतड़ों को दबा देता था। उसके नरम चूतड़ मुझे बहुत ही सेक्सी लगते थे। पर मुझे उसे चोदने का अवसर कभी नहीं मिला था।

आज ये अचानक सब कैसे हो गया। मेरी किस्मत अचानक ही कैसे खुल गयी। मै सीधे उसके पास आ गया और जोश में उसे जकड़ लिया। उसके ठन्डे बदन से मुझे एकबारगी झुरझुरी आ गयी। उसके ठन्डे होठ मेरे होन्ठो से चिपक गये। उसके मखमली बदन का अहसास मेरे जिस्म में होने लगा। मेरा लण्ड तन गया था। उसके नरम और ठन्डे बदन को मैं सहला रहा था। वो भी मेरे बदन से ऐसे लिपट रही थी कि कहीं मैं उसे छोड़ कर ना चला जाऊँ। मेरा लन्ड बहुत टाईट होता जा रहा था। मेरे बदन में सिरहन बढती जा रही थी। मेरा लन्ड रह रह कर चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। रूबी बोली -”रुको……ऐसे नहीं……… तुम लेट जाओ…… और उतारो ये पेन्ट और कमीज………”

मै अपने कपड़े उतार कर उसके सामने नंगा हो गया। उसके मुँह से सीत्कार निकल गयी।

“जोऽऽऽऽऽऽ …… हाय रे……… तुम तो गजब के हो … तुम्हारा ये बोडी …… कहां छुपा रखा था ये बदन………”

“मै तो शुरु से ही ऐसा हूं ………क्यो ऐसा क्या है……” मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया पर थोडी हैरानी हुई।

उसने कुछ नहीं सुना… बस मेरे नंगे बदन से लिपट गयी। मेरी तरफ़ उसने सेक्सी निगाहों से देखा और अपना झीना सा गाउन नीचे उतार फ़ेंका। मेरी नजरें उस से मिली। उसकी आखों में वासना के लाल डोरे खिन्चने लगे थे।

मेरे मुँह से भी निकल पड़ा -”हाय… ये चिकना चमचमाता शरीर……… रूबी ………जान लोगी क्या……” वो मुसकरा उठी।

रूबी ने अपने ठन्डे हाथों से मेरा लन्ड पकड लिया। अब वो मेरे लन्ड से खेल रही थी। मेरा लन्ड फ़ूल कर मोटा और कडक हो गया था। उसने मेरे सुपाडे की चमडी खींच कर उसे खोल दिया। अब वो उसे उपर नीचे कर रही थी। मुझे मीठी मीठी तेज गुदगुदी होने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ना चाहा तो उसने प्यार से मेरा हाथ हटा दिया और मेरे लन्ड को पकड़ कर मुठ मारने लगी। मेरे सारे शरीर में सनसनाहट होने लगी।

“रूबी……… हाय……… मजा आ रहा है … और मुठ मार …… हाय……आज तो बस ऐसे ही मेरा रस निकाल दे रूबी………”

उसने मुठ मारते मारते अपने मुंह में सुपाडा ले लिया। उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मारने लगे। उत्तेजना में सब अच्छा लग रहा था। उसके हाथ और तेज चलने लगे… मुंह से लन्ड चूसने की मधुर आवाजें आ रही थी। उसके बाल लहरा रहे थे। मुठ मारती जा रही थी… रूबी का जिस्म भी कम्पकंपा रहा था। उसके पीछे उभरे हुये गोल गोल चूतड़ों को मैं मसल रहा था।

“राजा ……… मजा आ रहा है ना……” उसके नाखून मेरे शरीर पर खरोन्चे मार रहे थे। मै चरम सीमा पर पहुच रहा था। वो उतना ही तेज रगडने लगी थी। अब वो अपने दान्तो से मेरा सुपाडा भी चबा लेती थी। अन्तत: मैं मचल पडा…मेरा लन्ड से पिचकारी छूट पडी।

उसके चेहरे पर पर गाढ़ा गाढ़ा सा सफ़ेद वीर्य लिपट गया। उसने बेहिचक वीर्य को चाट चाट कर साफ़ कर दिया। रूबी उठी और बाथरुम में चली गयी। अपना मुँह साफ़ करके मेरे पास आ गयी।

“मजा आया जो…… तुम्हारा लन्ड… लगता है बडे प्यार से पाला है…।”

मै हंसने लगा……

तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया …… मैं उठा और पेन्ट पहन ली ।

मैने दरवाजा खोला तो वहां कोई नहीं था। मैने पीछे मुड़ कर देखा तो रूबी भी वहां नहीं थी। इतने में एक बूढा वेटर सामने के कमरे से निकला। मुझे देखते ही वो चोंक गया।

“सर … आपका कमरा तो २० नम्बर है……”

“ना…… नहीं… मैं तो यहां…।”

उसने मेरा रूम खोल दिया…। “आईये ……… उस कमरे में किसी भी हालत में मत जाना………”

” अच्छा …ठीक है ठीक है ……” मै हंस दिया।

मैने अपने कपड़े उठाये और अपने कमरे में आ गया। बूढे वेटर ने १९ नम्बर में ताला लगा दिया। मुझे पता था कि रूबी पीछे से निकल गयी होगी।

मै बिस्तर पर जा कर लेट गया। पता ही नहीं चला कि कब नीन्द ने आ घेरा। अचानक मेरी नीन्द खुल गयी। देखा तो रुबी अपने हाथ से मेरे शरीर को सहला रही थी। मै उठ कर बैठ गया। उसके सहलाने से मेरे लन्ड में तरावट आने लगी थी।

“तुम … यहां कैसे आ गयी ? दरवाजा तो बन्द था…”

“हाय।…… मेरे राजा……… वैसे ही … जैसे वहां आयी थी……”

“अच्छा ये बताओ कि माईकल का क्या हुआ… उसने तुमसे शादी नहीं की……तुम्हे तो वो बहुत प्यार करता था…”

” पर मै उसे इतना सा भी नहीं चाह्ती थी…… मै तो तुमसे प्यार करती थी…… और तुम ऐसे निकले कि मुझे छोड कर चले गये”

“पर शादी की बात तो उस से चल रही थी ना……”

“मुझे नहीं करनी थी शादी …उन्होने मुझे बहुत मारा पीटा… पर मै नहीं मानी……माईकल ने तो…अब क्या कहूं…… और फिर मजबूरन ……”

“क्या मजबूरन…… बोलो…”

“अरे… छोड़ो ना……इस मस्ती के समय में अच्छी बातें करो… मुझे तो तुम्हारा लन्ड बहुत प्यारा लगा……”

उसने मेरा पेन्ट खीच लिया……… फिर से मुझे नन्गा कर दिया। उसने भी बिना समय बरबाद किये अपना गाउन उतार फ़ेन्का। एक बार फ़िर से हम दोनों नन्गे थे।

“मेरे राजा… जल्दी करो…ऐसा मौका बार बार नहीं आता है……” उसने अपना शरीर मेरे शरीर से रगडना चालू कर दिया। फिर से हम एक बार वासना की दुनिया में पहुंचने लगे। उसके तीखे नाखून फिर से मेरे अंगों पर चुभने लगे… पहले की नाखूनो की जलन अब भी थी। पर उत्तेजना के कारण अब मह्सूस नहीं हो रही थी । मेरा लन्ड एक बार फिर उफ़न पडा…… मीठी सी जलन बढने लगी। उसके होन्ट मेरे होन्टो से चिपक गये। उसकी आंखे लाल हो उठी।

उसक शरीर जल उठा। उसके बदन में एक कडापन आ गया…। उसके उरोज कडे हो गये थे। मेरा लन्ड अब बहुत ही कडा हो गया था। मुझसे अब और नहीं सहा जा रहा था। मेरा लन्ड उसकी चूत में घुसने को बेताब होने लगा था। मैने थोडी सी हरकत करते हुये अपना लन्ड उसकी चूत में ठेल दिया।

“आऽऽऽह्……… जो … घुस गया रे …… सोलिड लन्ड है…… दे …धक्का मार यार।…”

‘ मेरी रूबी …… आऽऽऽऽऽ ह …… बहुत चिकनी है रे ……” लन्ड सरकता हुआ चूत में अन्दर तक बैठ गया।

“राजा…तुम्हरे लिये ही सम्हाल कर रखी थी……” उसकी लाल लाल आंखो मै वहशीपन साफ़ झलक रहा था। तभी उसने मेरा लन्ड बाहर निकाला और उसने तुरन्त मुझे उठाया और खुद घोड़ी बन गयी।

“राजा मेरी गान्ड मारो …। बडी बैचनी लग रही है…… देखो ना……सिर्फ़ तुम्हारे लिये मैने इस गान्ड को कुंआरी रखी है।”

मुझे होश कहां था। मेरा लन्ड कडकता जा रहा था… मेर सुपाडा भी गीला हो रहा था। मैने उसके चूतडो की फ़ान्को को खोला और उसकी गान्ड के छेद पर लन्ड रख दिया। और……वो चिल्ला उठी…।

“धक्का दे जोऽऽऽऽ … घुसेड़ दे लन्ड को……”

‘उसने अपनी गान्ड का छेद को हाथ से फ़ैला दिया। उसका छेद पूरा खुल गया। मैने लन्ड जोर लगा कर अन्दर बैठा दिया। मुझे उसकी गान्ड के छेद नरम लगा। बडी आसानी से…, बिना किसी तकलीफ़ के अन्दर घुसता चला गया। इतना कि मेरा पूरा लन्ड ही अन्दर चला गया। तभी उसने अपनी गान्ड सिकोड़ ली। इतनी जोर से सिकोडने से मेरे लन्ड पर चोट लग गयी। पर उसका चिल्लाना जारी रहा।

“चोद दे राजा …आऽऽऽह्……… मजा आ रहा है…” मै दर्द के मारे तडप उठा। उसकी गान्ड का कसाव तकलीफ़ दे रहा था।

“रूबी………… ढीला करो… क्या कर रही हो……”

‘उसने पीछे मुड कर मुझे देखा…और अपनी गान्ड ढीली छोड दी… उसकि आंखो में एक वहशीपन था…। उसकी आंखों में जैसे खून उतर आया हो। वो एक कुटिल मुस्कान देती हुयी बोली…”राजा… बडी प्यासी है मेरी गान्ड……प्लीज्… लगाओ धक्के पर धक्का…… आज प्यास बुझा दो मेरी…।”

मैने उसकी गान्ड चोदनी शुरु कर दी। वो भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर साथ दे रही थी। मै अपने होश खोता जा रहा था। मै उसकी गान्ड मराने कि स्टाइल पर फ़िदा हो गया… अब उसकी गान्ड मक्खन की तरह नरम लग रही थी। मुझे लगा कि मैं चरमसीमा पर पहुँचने वाला हूँ तभी रूबी ने गान्ड से लन्ड निकाल दिया।

शायद वो जान गई थी कि मैं थोडी देर में झड़ जाऊंगा। और लन्ड गान्ड से निकाल कर अपनी चूत में घुसा लिया……

” हाय मर गयी ……” रूबी के मुह से सिस्कारी निकल पडी। चूत पूरी गीली थी…… लन्ड सरकता हुआ अन्दर चला गया। मेरे लन्ड में तेज गुदगुदी उठी… ये उसकी कसी हुई चूत का कमाल था। लन्ड पूरा अन्दर घुस कर जैसे ही बाहर निकला … रूबी के मुँह से तेज सिस्कियां निकलने लगी। उसे देख कर मेरा लन्ड भी पिघलने लगा………लन्ड के अन्दर बाहर चलने की मेरी रफ़्तार बढ गयी। जोर लगा कर लन्ड पेलने लगा…। उसके चूतड़ जोर से उछल उछल कर मेरा साथ दे रहे थे।

“हाय…राजा……कस के चोद दे…………दे रे जोर से धक्के दे…… मेरी फाड़ दे………… हाय रे………”

वो पागलो की तरह चुदा रही थी। जैसे कि आगे अब उसे चुदने को नहीं मिलेगा। मेरी अब सहनशीलता खतम होती जा रही थी… पर जैसे रूबी सब जानती थी। स्खलित होने के अन्दाज में वो चीख उठी…”राजा मै तो गयी………… लगा दे पूरा जोर…। निकाल दे मेरा पानी……… हाय रे……… मै तो गयी…॥”

“रानीऽऽऽऽ मैं भी गया…। मेरा भी निकला … हाऽऽऽऽऽऽऽऽ निकला ओओओऽऽऽऽऽऽ……”

रूबी झड़ने लगी थी ………… मेरा लगभग उसके साथ ही वीर्य निकल पडा। वीर्य निकलने के साथ ही मेरा सारा जोश ठन्डा पडता जा रहा था। अचानक मेरी नजरे उसकी चूत पर पडी।

उसमें से वीर्य के साथ खून भी आ रहा था…। मै खुश हो गया कि रूबी अब तक मेरे लिये कुँआरी थी। रूबी ने अन्गडाई ली और तुरन्त उछल कर बिस्तर से नीचे आ गयी। उसने नीचे देखा और उसने अपनी चूत से खून भरा वीर्य टपकते देखा और हंसती हुयी बोली -

“जो… मजा आ गया राजा…फिर कभी मौका मिलेगा तो मै तुम्हारे पास प्यास बुझाने आउंगी…। देखो मना मत करना………। नहीं तो……………।” उसने मुझे तिरछी नजरो से घूरा। मैं सहम सा गया। फिर वो बाथरूम में चली गयी। मै थोडी देर बैठा रहा। अचानक मेरे लन्ड में दर्द उठा। मैन देखा तो मेरे लन्ड से खून की बून्दे टपक रही थी। लग रहा था कि लन्ड की कोई नस फ़ट गयी है…। या कोई चोट लग गयी है। लन्ड की त्वचा जगह जगह से फ़ट गयी थी। तो वह खून उसकी चूत में से नहीं… मेरे लन्ड का था……।

मै बाथरूम में गया तो वहां कोई नहीं था……… न कोई खिड़की …न कोई दरवाजा… न कोई रोशनदान…। ये क्या हुआ…। कहां गयी रूबी……। मैंने अपने लन्ड को पानी से धोया। मैने पेन्ट पहना और बाहर आया। वही बूढ़ा वेटर वहाँ से निकल रहा था। मैंने उसे बुलाया,”वेटर … सुनो…… यहां पर काउन्टर पर जो लड़की बैठती है …वो रूबी नाम है…”

“ज़ीऽऽऽ क्या कहा आपने… हमारे होटल में कोई लडकी काम नहीं करती है………” वो बचता हुआ आगे जाने लगा।

“अरे वो … जिसका कमरा नम्बर १९ है…………”

“देखिये साहब … कमरा नम्बर १९ हम किसी को नहीं देते हैं………… वहां पर किसी ईसाई लडकी ने आत्महत्या कर ली थी…। मैने नहीं कहा था, इस कमरे में मत जाना…।”

“नही…… नहीं……कमरे की नहीं… मै रूबी की बात कर रहा हूँ………वैसे उस कमरे में ऐसा क्या है…” उसने मुड कर मुझे देखा ……और उसका स्वर कमजोर हो गया……

“हां… मै जानता हूँ…तुम्हें भी… तुम जो हन्टर हो ना…तुम रूबी ही की बात कर रहे हो……और कमरा……उसके कमीने प्रेमी ने उसका बलात्कार यही किया था………।”

मै सुन कर सन्न रह गया ………… तो क्या माईकल ने………… उसे रूबी दी बाते याद हो आयी…

“तो क्या वो माईकल था…?”

” हा…… तुम उसे जानते हो ना…………उसकी कब्र चर्च के पीछे है…………” मायूसी भरी आवाज में बोला

“क्या……… वो भी मर गया ……कैसे……”

“उसे तो मरना ही था… रूबी की रूह उसे छोडती क्या……… अरे हाय रे!!!!! मैं उसी रूबी का बाप हूं”

“अन्कल ……!!!” उस बूढे वेटर की आंखे गीली गो उठी।

मै लड़खडाता हुआ कमरे में आ गया और सर थाम कर बिस्तर पर बैठ गया। मैने अपने जिस्म पर पडे नाखून के खरोन्चो को स्पिरिट से साफ़ करने लगा। थोडी ही देर में लण्ड में सूजन आ गयी………

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सुमित की शादी का सफर

सुमित की शादी का सफर

प्रेषक : SEXY BOY

सभी दोस्तों को मेरा सादर प्रणाम और प्यारी भाभियों और कुंवारी !! चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम. मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ । दोस्तों मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ. मेरी उमर ३८ साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और ६”४” लम्बा हूँ. मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।

जैसा की अक्सर कहानियो में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कही अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।

हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है। यह एक बहुत ही सुंदर लैक है और यहां के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं। पर यहां की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंने बहुत बाद में जाना। मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपने एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होने के कारण हैंडसम भी दीखता था. लेकिन मुझे अपने लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे।9251602709

मेरे घर के सामने ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने सभी सपने सन्जोए। एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामने से आती हुई ३ लड़कियों पर नज़र पड़ी। उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती है। तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी. हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई. मै सिर्फ़ बनियान और नेक्कर मैं था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसने भी मुझे भरपूर नज़र देखा. मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होने से मैं नीचे पत्थर नही देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनो लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई. मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मै कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नही जा पाया.

ठंडों का मौसम चल रहा था हमारे मोहल्ले मैं एक शादी थी. मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे. उस शादी में मैं अपने ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था. और मै जयादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदने या दर्शन करने के। पर किस्मत ख़राब. कोई नही मिली. मुझ से किसी खनकती आवाज ने कहा ” सुनिए आप तो बहुत अच्छे लग रहे है आप और बहुत मेहनत भी कर रहे है यहां “

मैंने जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मै गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमे ३ टाँके लगे हुए थे और घुटने का भी हाल कुछ अच्छा नही था… मैंने देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी. मैंने कहा “आ आप ….. आपने मेरे से कुछ कहा”

” नही यहां ऐसे बहुत सारे लोग है जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे” वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली।9251602709

” आप लोग तो हंस कर भाग गई…. मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी” मैंने कहा

मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की ज्योति जिसे मै पहले पटाने की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लडाई हो गई थी. ज्योति ने मेरे से मुह चिड़ाते हुए कहा इनको ” च्च्च च्च छक … अरे!! अरे!! बेचारा….. देव भैया अभी तक कोई मिली नही तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरने लगे ” और खिल खिला कर हंस दी …..

मैंने ज्योति के कई सपने देखे मै ज्योति को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कही ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छु रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है उसके बूब्स टच होने से मेरा लंड खड़ा हो जाता है तो मै धामोनी रोड के जंगल मै गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपने गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया(बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मै उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपडों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटने लगा ज्योति भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो…….. मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है ……. कह रही है और मै ज्योति को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदने लगता हूं। पहले ज्योति का पानी छूटता है फिर मेरा.. जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारने से लंड लाल हो गया है

मुझे बहुत बुरा लगा ज्योति के तानों से मेरी बे-इज्ज़ती हुई थी वहां से मैंने इन दोनों को सबक सिखाने का ठान लिया. मैंने गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठने वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहने यहां वहां घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे . पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था .. मैंने ज्योति को उसके हाल पर छोड़ कर अपने टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करनाउचित समझा

मै उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था.. मेरा तकिये के कोने मेरे स्पेर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे. पर कोई लड़की अभीतक पटी नहीं थी.

इसबार मैंने हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया. जहा वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा “आप क्या लेंगी और….. कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए…

भीड़ बहुत थी उस शादी मैं वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खाने लगी. मैंने उसको पूछा “आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही है.. मेरा नाम देव है आपका नाम जान सकता हूँ…” फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा. हलके से मुस्कुराते हुए बोली” अभी नही सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया”9251602709

मैंने उसका नाम वहीँ उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था. उसका नाम मीनू था. वो मेरे घर के ही पास रहती थी. पंजाबी फॅमिली की लड़की थी. सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी. उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे ३२ के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके. वो मेरे मन को बहुत भा गई थी. शादी से लौट के मैंने उस रात मीनू के नाम के कई बार मुट्ठ मारी. मै उसको पटाने का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामने से रोज निकलती थी पर हम बात नही कर पाते थे. ऐसा होते होते करीबन १ साल बीत गया.

एक बार मै दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से. स्टेशन पर गाड़ी आने मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी. मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था. तभी मुझे मीनू दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बेर्स भी थे। उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करने लगे. मैंने पूछा “कहा जा रहे हो” तो बोले “मौसी के यहां शादी है दिल्ली मैं वहीँ जा रहे है”.

मुझ से पूछा ” देव जी आप कहा जा रहे हो”

मैंने कहा ” दिल्ली जा रहा हूँ थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है”

इतने में ट्रेन आने का अनौंसमेंट हो चुका था। उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंने मेरे से सामान गाड़ी में चढाने की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी. मीनू के भाई ने बताया की इसी कोच में चढना है तो हम फटाफट उनका सामान चढाने मैं बीजी हो गए. उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करने लगा मैंने अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जाने की कोई हड़बड़ी नही थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है. क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मै उनका सामान एडजस्ट करता रहा.

गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी. मै पसीने मैं तरबतर हो गया था. अब तक गाड़ी ने अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी. मीनू की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी. गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना मैं जुड़ कर दिल्ली जाती थी. इसलिए बीना मैं भीड़ कम हो जाती है. मै सबका सामान सेट करके थोड़ा चैन की साँस लेने कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा “यह कौन सा कोच है ” उसने घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा एस ४…. तुम्हें कौन सो छाने ( आपको कौन सा कोच चाहिए)” “अरे गुरु जोई चाने थो …. जौन मैं हम ठाडे है ….. (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)”

मैंने अपनी टिकेट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे मीनू थी बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी. बीना मैं मैंने हल्का सा नाश्ता किया और घूमने फिरने लगा. मुझे अपने बैग का बिल्कुल भी ख्याल नही था. बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ गई थी मुझे अपने बैग का ख्याल आया. मै उनकी सीट के पास गया तो मैंने “पूछा मेरा बैग कहा रख दिया.” मीनू की कजिन बोली ” आप यहां कोई बैग नही छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढवा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नही था” जबकि मुझे ख्याल था की मैंने बैग मीनू की सीट पर रखा था. वो लोग बोली की आपका बैग सागर मैं ही छूट गया लगता है.

मैंने कहा कोई बात नही. उन्होंने पूछा कि आपकी कौन सी बर्थ है मैंने कहा इसी कोच मैं लास्ट वाली. मीनू की मम्मी बोली “बेटा अब जो हो गया तो हो गया जाने दो ठण्ड बहुत हो रही है ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो”

मैंने कहा “जी कोई बात नहीं मै मैनेज कर लूँगा”

” ऐसे कैसे मनेज कर लोगे यहां कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो” मीनू की मम्मी ने कहा.

“मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी..” मैंने मीनू की ऑर देखते हुए कहा. मीनू बुरा सा मुह बनके दूसरे तरफ़ देखने लगी.

ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौडी जा रही थी. मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला. रुको मम्मी मै अपना कम्बल दे देती हूँ और मै वो वाला ओढ लूंगी. मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी….. मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी. मै फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया

… मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था. मै मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी. मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.. मीनू और मै एक ही कम्बल मै नंगे लेटे हुए है मै मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है. मेरा लंड मै जवानी आने लगी थी जिसको मै अपने हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ मीनू के शरीर को महसूस कर रहा था.

जैसे जैसे मेरे लंड मै उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मै मीनू के शरीर को अपने कम्बल मैं अपने साथ महसूस कर रहा था. इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मै मीनू के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दाने) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ मीनू के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.. इधर मीनू भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मै बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ देव ……. जबसे तुमको देखा है मै रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से …… चोदती हूं …उम् म ….. आ अ अ अ …. तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा देव …. उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नही हो रहा उ मम म आया अ अ अ और मै एक झटके में मीनू की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारने लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के … फटाफट जैसे मीनू झड़ रही हो उम् मम् देव ……मेरी बुर र … सी पेशाब…. निकलने वाली ही तुम्हारे लंड ने मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही मीनू झडी मैं भी झड़ने लगा मै भूल गया की मै ट्रेन मै हूँ और सपने मै मीनू को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया…. हा ह मीनू… ऊऊ मजा आ गया मै कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़ने लगा और बहुत सारा पानी अपने रुमाल मैं निकाल कुछ मीनू के चादर मैं भी गिर गया.

जब मै शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंने देखा कि मै तो अकेला ट्रेन मै सफर कर रहा हूँ.. शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी. ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जाने के लिए उठाना था मै हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नही हुई.. अब तक रात के १.३० बज चुके थे मै जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे मीनू की सीट से किसी ने मुझे रुकने का संकेत किया हो मीनू की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मै सो रहे थे और ट्रेन अभी १ घंटे कही रुकने वाली नही थी. मैंने देखा मीनू हाथ मै कुछ लिए आ रही है.. मेरे पास आकर बोली “बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे” ठंड मैं ठिठुरते हो …”

मैंने उसकी बात पर ध्यान नही दिया उसने क्या मेसेज दे दिया मै रिप्लाई दिया ” मैं तुम्हारे कम्बल मै तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था” मै अपने लंड के पानी से भरा रुमाल अपने हाथ मै लिए था. जिसको देख कर वो बोली “यह क्या है” मैंने कहा ” रुमाल है”.

“यह गीला क्यों है” मीनू ने पूछा ” ऐसे ही… तुम्हारे कारण … कह कर मैंने टाल दिया…..

मीनू ने पूछा “मेरे कारण कैसे……” फिर मुझे ध्यान आया की अभी अभी मीनू ने मुझे कुछ मेसेज दिया है….

मैंने मीनू को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मै देखते हुए उसको कहा मीनू आई लव यू और उसके लिप्स अपने लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरने लगा. मीनू भी मेरा किस का जवाब दे रही थी…..

मै मीनू के दूधों की दरार मै चूसने लगा था और बूब्स को दबा रहा था… मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरने लगा और उसके पेट से टकराने लगा.. मीनू मेरे से बोली आई लव यू टू.. इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेक्ट कोच की और इशारा कर के कहने लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो …..

हम दोनों टॉयलेट में घुस गए…. टॉयलेट को लाक करते ही मै उसको अपने से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमने लगा.. मीनू मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ……9251602709

हां! मेरे राजा देव मै भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी….. जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जाने का …..मेरे आने का मै तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.. तो उन्होंने बताया की देव को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नही जा सकती उनके साथ. तब मैंने भी मम्मी को प्रोग्राम बनने को कह दिया मैंने कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो

मैंने उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपडों के ऊपर से ही चूसने चूमने लगा….. मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा वो “सी ई ईई आई वहां नही वहां कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहां नही” ऐसा कहने लगी

मैंने कहा “मुझे विश्वास नही होता मुझे दिखाओ ” ऐसा कहकर मै सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करने लगा

” हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है ” मीनू बोली

मैंने मीनू के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदने लगा और कहा ” ठीक है जैसा तुम कहो पर मै कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा”” मीनू भी अब गरमाने लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होने लगी थी. वो अपने दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचने से रोक रही थी… ” प्लीज़ वहां नही मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपने आप, को कुछ हो जायेगा …. मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंने। यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जाने दो अब…”

मैंने मीनू के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपने मुह में ले लिया… उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था…..

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया.. मीनू कहे जा रही थी” प्लीज़ नो ! मुझे जाने दो उई मा मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जाने दो…. और.. जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है मीनू के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मै हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था मीनू मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी … उम्म मै मीनू की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था।

मीनू अपने दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी मीनू की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी मीनू हलके हलके से करह रही थी ” उम्म्म आआ मर गई” मैं मीनू की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दाने को चाट और चूस रहा था.. सलवार पहने होने के कारण चूत चाटने मैं बहुत दिक्कत हो रही थी.

मीनू की चूत झड़ने के कगार पर थी” आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नही हुआ मेरी पेशाब निकलने वाली ही अपना मुह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ . उई माँ आअ अ …. उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुह को अपने चूत के अमृत से भरने लगी…… मीनू के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर ३२ से ३४ होगये मालूम होते थे… इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी … मैंने मीनू को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेने दो मीनू ने कहा ‘ अभी नही राजा मै तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवानेको.. उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है “

मैंने कहा “अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है ” “मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई” और वो खड़ी होने लगी मै कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुह खुला का खुला रह गया.

“हाय राम… ममम म इतना बड़ा और मोटा……….तो मैंने कभी किसी का नही देखा

मैंने पूछा “किसका देखा है तुमने… बताओ “

मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मै अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.. भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मै तो मेरा क्या हाल करेगी… मै कभी नही घुसवाउंगी”

मैंने कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”

“मै कैसे शांत करू” मीनू ने कहा

मैंने कहा “टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो” मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया. पहले तो मीनू थोड़ा हिचकी फिर बोली ” तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होने लगी है……हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क ” एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसने किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मै जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंने उसके मुह में धक्के मारे मैंने कहा मेरा पानी निकलने वाला है.

” मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ ………..” मीनू सिसकारियां भर रही थी मैंने मीनू को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुह मै भर दिया….. जिससे लंड घुसने पर वो चिल्लाये नही मैंने उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .. मैंने उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मै भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी. मीनू कसमसा रही थी ” हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.. मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जाने क्या हो गया है” मीनू ने कुर्ती मुह से निकाल कर कहा.

मैंने अपने लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मै भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे…. मैंने लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा मीनू की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा .. मीनू अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नही रह सकती थी

उसने मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंने पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया…. मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो. इतनी टाइट बुर थी मीनू की मैंने थोडी और लंड अंदर पेला मीनू की मुह मै यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते….

मीनू मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है…….. मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे मीनू की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया मीनू की तो हालत ख़राब हो गई थी.. मैंने थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारने लगा. मीनू की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मै उबाल आना शुरू हो गया था.. मैंने मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और मीनू के मुह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मै हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.

मै अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था…” मीनू की बुर पानी छोड़ने वाली थी क्योंकि उसने अपनी कुर्ती वापिस अपने मुह में डाल ली थी और मीनू की बुर मेरे लौडे को कसने लगी थे मै मीनू के ३२ से ३४ साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.. मीनू बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड ने भी आखिरी सांसे ली तो मैंने मीनू के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा मीनू की टाइट बुर मै आखिरी जड़ तक पेल दिया और मीनू की बूर को मैंने पहला वीर्य का स्वाद दिया मीनू भी बहुत खुश हो गई थी. जब साँस थमी तो मैंने लन्ड मीनू की बुर से बाहर निकाल जिससे मीनू की बुर से मेरे वीर्य के साथ मीनू की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.

मैंने मीनू को हटाया और कमोड में पेशाब करी मीनू बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसने मुह भी लगा दिया. उसका पूरा मुह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुह में जा पाया मैंने अपना लंड धोया नही उस पर मीनू की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहने दिया और नेक्कर के अंदर किया मीनू की बुर मै सुजन आ गई थी मै इंतज़ार कर रहा था की अब मीनू भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसने मुझे बाहर जाने को बोला. मै उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया. मैंने अपनी घड़ी मै टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में… शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नही जागा था और ट्रेन भी नही रुकी थी. थोडी देर बाद मीनू अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंने पूछा क्या हाल है जानेमन तुम्हारी बुर के ” सुजन आ गई है पर चुदवाने मै बहुत मजा आया फ़िर से चुदवाने का मन कर रहा है

” ये लो यह रूमाल तुम वहां छोड़ आए थे। स फक्स….इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा” यह वोही रुमाल था जिसमे मैंने मीनू के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देने लगी. “इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मै मेरे लंड ने उडेला है…. और तुम क्या लिए हो” मैंने मीनू को कहा… उसने पहले सूंघा फूले कहने लगी ” ये मेरी पैंटी ही… ख़राब हो गई थी तो मैंने निकाल ली.. और तुम्हारा रुमाल मै ले जा रही हूँ इसे अपने साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.. तुम दिल्ली में कहां रुकोगे.. और किस काम से जा रहे हो” मीनू ने मेरे से पूछा . तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंने मीनू से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहां और क्यों जा रहा हूँ. पहले तो मीनू मुझे घुड़की “तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का” मैंने कहा ” वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मै तुम्हारी पैंटी अपने लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा” उसने मेरे को चुम्मा देते हुए कहा “पागल” और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंने वहां जहां उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो मीनू शर्मा गई

मैंने मीनू को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई. मैंने कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मै बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे.

मीनू मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मै अपनी सीट पर. अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंने बैग मै से एयर पिल्लो निकाल और अपने सिराहने रख कर मीनू को याद करने लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खडा होने लगा सो मैंने सीट पर लेटकर मीनू की पैंटी सूंघने लगा उसमे से मीनू की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी. उस स्मेल ने कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंने मीनू की पैंटी का वो हिस्सा जो कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंने फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेक्कर के अंदर मैंने मीनू को सपने में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारने लगा मैंने अपना सारा पानी मीनू की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मै निकाल दिया ३ बार झड़ने के कारण पता ही नही चला की कब मै सो गया”

सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है.. तो मैंने आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है …. मुझे जगाने वाला मेरा साला मीनू का भाई था बोला ” देव जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले १५ मिनिट से सभी आपने घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ” मै फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया. वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेमन मीनू पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी. उसके चेहरे से कतई ऐसा नही लग रहा थी कल रात को मैंने इसी ट्रेन मै मीनू की बुर का अपने हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी

प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी। सुनहरी धूप खिली थी मै टीशर्ट और नेक्कर मै खड़ा था. मैंने मीनू का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मै अपने एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे मीनू के दूध दबा रहा हूँ और यह मीनू को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.

मैंने उन लोगों से पूछा कि आप कहा जायेंगे मीनू का भाई बोला हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहा जाना है. मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था वहा पर मेरे दोस्त की शादी है… मैंने उन लोगों को जवाब दिया.

मैंने कहा मेरे साथ चलिए…. मुझे लेने गाड़ी आई होगी बाहर….वो लोग बोले नही नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है….

मैंने कहा इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नही हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होने लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नही लगेगा. मीनू की कजिन धीमे से बोली रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है… और मुझे मीनू को देखकर हलके से मुसकुरा पड़ी. हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंने मीनू के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त ने भी बड़ी गाड़ी भेजी है. इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.

गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंने गाड़ी साइड मै रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपने दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या… उसने पूछा क्यों…. मैंने कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मै अपने लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ… रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नही आया। तसल्ली से मारना चाहता हूँ.

मेरा दोस्त बोला ” देव भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नही थी यह एक ही रात में तुमने कैसे तीर मार लिए और तुमने उसे चोद भी डाला!

मैंने कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नही तो मै होटल जा रहा हूं। मुझे मेरे दोस्त ने आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.

मै फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मै बैठा और इंतज़ार कराने के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलने का हुकुम दिया …मैंने पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मै किसके यहां जायेंगे…मीनू की मम्मी बोली ” बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है… कल की मिस्टर कपूर… रोहन कपूर…..

” ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई” मै उछलता हुआ बोला.. सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मै आगे बोला ” वो.. वो.. क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मै जाना है..

बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नही चला…. पर मै सुमित से आँख नही मिला पा रहा था.. जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंने ड्राईवर को रुकने को बोला और अपना बैग गाड़ी मै छोड़ कर सुमित को बुलाने उसके घर मै गया… सुमित आकर मेरे से लिपट गया.. बहुत खुश था सुमित पर मै उससे आँख नही मिला पा रहा था मैंने सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला ” देख यारा बुरा मत मानियो .. तुम्हारे यहां मेहमान बहुत है मै ऐसा करता हूँ कि मै और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मै रुक जाते है..”

मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.. सुमित ने कहा ” देख भाई देव मै जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नही तुमने रेखा (मीनू की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.. इससे कोई फर्क नही पड़ता.. यदि तुम मीनू को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नही थी मै भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नही मिला या मेरी हिम्मत नही हुई.. इसे दिल पे मत ले यार” मौज कर यारा मैंने तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में।

यह सुनकर मेरी जान में जान आई. मै सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मै रेखा नही मीनू को चोदना चाहता हूँ.” सो मैंने कहा मैंने मीनू को चोदा है ट्रेन में…. और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं..

सुमित बोला ” सेक्सी तो रेखा थी पर तुमने मीनू को कैसे चोद लिया.. वो बधाई हो माई बोय………..तभी मीनू थोड़ा लंगडा के चल रही थी. तुमने तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो २ दिन चल फ़िर भी नही सकी थी”

” तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो .. कैसे हो देव बेटा” कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे…..

मैंने उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी. फ़िर सुमीत मेरे को अपने रूम मैं ले गया.. सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे। बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत ने मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ ३ ही कमरे थे और मीनू वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.. रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था।

सुमित बोला ” क्यों देव कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- मीनू की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसने मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहां से मीनू के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहां से उसके रूम मे. अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..

मैं सुमित को बोला ” सुमित तो मीनू की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?”

सुमित ने कहा कैसे मैंने मीनू की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघने को दे दिया.. मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे देव मीनू की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुने मेरे लन्ड का बदला ले लिया.. यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी… सुमित मेरे रूम से चला गया

घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंने रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होने और नहाने बाथरूम मैं घुस गया. बढ़िया गर्म पानी से नहाने लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकराने की आवाज आई। मैंने शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ मीनू नहा रही लगता महसूस हो रही थी…. मैंने …धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरने लगा मैंने आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.

मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नही पाई मैंने शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरने लगा उसने अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंने कहा यह जगह साबुन रखने की नही लन्ड रखवाने की है और मैं उसके चूत के दाने को मसलने लगा.

पहले तो उसने टाँगे सिकोडी पर दाने को मसलने से वो गरमा गई थी उसने अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंने अभी तक उसका मुह ताकत से बंद कर रखा था मैंने कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी … बहुत गरम और टाइट चूत थी.. मैंने अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदने लगा था, वो मस्ताने लगी थी थी और उसकी बुर पनियाने लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी।

मैंने अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.. तभी उसने अपने एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लौडे को छूने के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी

बहुत गरम और टाइट चूत थी.. तभी वो अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ अपने मुह से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी. मुझे उसकी यह हरकत ठीक नही लगी तो मै उसे बाथरूम से खीच कर अपने बेडरूम मै ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो रेखा थी…9251602709

मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और अपने टीवी की आवाज थोडी और बढा दी। रेखा का बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार ३६ साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, २ इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग। रेखा की चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी रेखा ने अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मै तो रेखा को नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था

रेखा अपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहने लगी प्लीज़ मुझे जाने दो .. मीनू नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.. मैंने पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.. बोली हां है मैंने कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहाने मै टाइम तो लगेगा ही. रेखा तुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मै रेखा के ऊपर टूट पड़ा।

रेखा के होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंने उसके होंठों को अपने ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसने लगा मै एक हाथ से रेखा की मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो रेखा छटपटाती रही पर जैसे ही मैंने उसके शरीर पर अपने शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़ने लगी. अब रेखा ने अपनी चूत से अपने हाथ हटा लिए थे मैंने रेखा के शरीर को सहलाना शुरू किया मै उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.

रेखा भी अब जवाब देने लगी थी और सिसियानी लगी थी रेखा का बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मै अब रेखा के निप्प्ल को चूसने के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा रेखा बहुत जोरो से सिसियाने लगी थी.. …… मैंने जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया रेखा छटपटाने लगी मै एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था

रेखा को रेखा को भी अब मजा आने लगा था उसने नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय देव मीनू की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमने उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंने देखा मीनू लंगडाकर चल रही थी

मैंने तुम दोनों की चुदाई के सपने देखते हुए ३ बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली। हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है…

मैंने कहा रेखा तुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मै तेजी से उसके निप्प्ल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलने लगा रेखा बहुत गरमा गई थी रेखा कहने लगी अब कंट्रोल नही होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नही रह सकती.. और जिसने एक बार चुदवा लिया उसके तो कहने ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी

मुझे जब मीनू ने तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया मै समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नही जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होने का मौका मिल जायेगा…हाय अब सहन नही हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो…….

मैं रेखा के माम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और रेखा का तना चूत का दाना मसल रहा था रेखा की चूत बहुत पनियाई हुई थी रेखा बहुत चुदासी हो रही थी रेखा की बुर पर करीने से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी रेखा की पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मै पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसने और चोदने में बहुत मजा आता है। मै रेखा की बुर को उसकी लम्बाई मै कुरेद रहा था और बीच बीच मै एक ऊँगली उसकी बुर मै घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता रेखा की बुर मै लिसलिसा सा पानी था मैंने ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत

मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ रेखा की बुर को चूसने के लिए तड़प उठी मैंने रेखा के पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मै रेखा की काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरने लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटने में बहुत मजा आ रहा था रेखा से रहा नही जा रहा था.. हाय देव यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नही हुआ। हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ रेखा ने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुह पर रगड़ रही थी

मैंने रेखा की दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया। सी हाई मर गैईईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंने रेखा की पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है देव उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी ने ऐसा मजा नही दिया ओम्म्म मेरी चूत झरने वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो। मैंने अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी

रेखा अपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंने अपनी जीभ रेखा की गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर ने तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मै तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया रेखा मेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसने मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों ६९ में हो गए

रेखा मेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की रेखा पहली बार नही चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मै रेखा की बुर के दाने को तेज़ी से चूस रहा था रेखा मेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मै जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से रेखा भी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंने अपना लंड यदि जल्दी रेखा के मुह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मै रेखा के मुह से लंड निकाल कर रेखा की बुर को और गहराई से चूसने लगा।9251602709

रेखा फ़िर से तैयार थी.. हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी। मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपने जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है। आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा….. मैंने रेखा की गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मै और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नही हुआ तो मैंने फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.. अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़ने से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मै उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था रेखा अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मै घुसाने के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मै मीनू नही रेखा हूँ मै चूत की खुजली से मर जाऊंगी मेरी बुर को चोदो… फाड़ो…

उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और रेखा के मुह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई। उई मीनू मेरी बुर में पहली बार किसी ने जलता हुआ लोहा डाला। हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंने रेखा से कहा रेखा जानेमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए। तुम्हारी चूत की तो मै आज बैन्ड बजा दूँगा

और मैंने रेखा के दोनों मम्मे अपने हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलने के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में रेखा की बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा रेखा की पाव रोटी वाली बुर मै धस चुका था

मै कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहने दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया। इस बार मेरा लन्ड रेखा की बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो. उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मै रेखा को हलके हलके धक्के देकर चोदने लगा रेखा को अब मजा आ रहा था

वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदने के इनाम में मै तुम्हारी मीनू के साथ सुहागरात मनवाऊंगी। बहुत मजा आ रहा है पहले किसी ने ऐसे नही चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई। अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरने वाली हूँ मैं जाने वाली हूँ सो मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी रेखा ने मेरे से कहा देव तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करने दो मै तुंरत लेट गया रेखा ने लौड़ा को ठिकाने पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकने लगी रेखा के ३६ साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे। रेखा बहुत तेजी से झड़ी पर मै अभी नही झरने वाला था क्योंकि पीछे ६-८ घंटो में ३ बार झर चुका था सो मैंने रेखा को कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा. रेखा कहने लगी देव बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर। मैं फ़िर मैंने और तेज़ी से धक्के मारे और रेखा की बुर की गहराई में झड़ गया रेखा ने मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवाने के वादे के साथ विदा हो गई ….

मैंने दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में मीनू के साथ भी सुहाग रात मनाई और रेखा और मीनू दोनों को चोदा पर यह सब बाद में
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